आंगनवाड़ी में रखी थी चूहे मारने की दवा…5 बच्चों ने प्रसाद समझ खा लिया जहर, मध्य प्रदेश के मंडला में हड़कंप!
Mandla की आंगनवाड़ी में बड़ी लापरवाही: 5 बच्चों ने चूहा मार दवा को 'प्रसाद' समझकर खाया। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती, एसडीएम ने दिए जांच के सख्त आदेश। बच्चे अब खतरे से बाहर।
- Written By: अर्पित शुक्ला
मंडला अस्पताल (Image- Social Media)
Mandla Anganwadi Kids Eat Rat Poison: मध्य प्रदेश के मंडला(Mandla) जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। मोहगांव विकासखंड के एक आंगनवाड़ी केंद्र में लापरवाही के कारण पांच छोटे बच्चों की जान खतरे में पड़ गई। बच्चों ने वहां रखी चूहा मार दवा को ‘प्रसाद’ समझकर खा लिया, जिसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। सभी बच्चों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
यह घटना मोहगांव विकासखंड के ग्राम रमखिरिया के छपरा टोला स्थित आंगनवाड़ी केंद्र की है। जानकारी के अनुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने अपने घर में, जहां केंद्र संचालित होता है, एक कोने में आटे के साथ चूहा मार दवा मिलाकर रखी थी।
सभी बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती
खेलते-खेलते बच्चों की नजर उस पर पड़ी और उन्होंने उसे खाने योग्य चीज समझकर खा लिया। दवा का सेवन करते ही बच्चों को उल्टियां होने लगीं और उनकी हालत बिगड़ने लगी।बच्चों की स्थिति खराब होते देख परिजन और वहां मौजूद लोग घबरा गए और तुरंत उन्हें मोहगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने बिना देरी किए प्राथमिक उपचार शुरू किया और जहर के प्रभाव को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए। बाद में बेहतर इलाज के लिए सभी बच्चों को जिला अस्पताल मंडला रेफर(Mandla) कर दिया गया।
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सभी बच्चे खतरे से बाहर
डॉक्टरों के मुताबिक अब सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत स्थिर है। फिर भी एहतियात के तौर पर उन्हें 24 घंटे निगरानी में रखा गया है। इस घटना ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंगनवाड़ी जैसे संवेदनशील स्थान पर जहरीली दवा खुले में रखना बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि ऐसे केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच होनी चाहिए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की इस चूक ने बच्चों की जान जोखिम में डाल दी।
एसडीएम सचिन जैन ने दिए जांच के आदेश
बीमार बच्चों में सचिन (3 वर्ष), समर (9 वर्ष), शिवन्या (3 वर्ष), कृतिका (5 वर्ष) और डेढ़ वर्षीय दीप्ती शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सभी बच्चे आपस में रिश्तेदार हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सचिन जैन ने जांच के आदेश दिए हैं और एक टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं।
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उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों(Mandla) में चूहा मारने की जहरीली दवाएं रखने पर रोक लगाने और इसके बजाय सुरक्षित उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
