MP में बंपर जीत के बाद भी क्यों नहीं मिली थी मामा को कुर्सी, बताई अंदर खाने की सच्चाई (फोटो- सोशळ मीडिया)
Shivraj Singh Chouhan Emotional Remark: मध्य प्रदेश में ‘मामा’ के नाम से मशहूर और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का दर्द एक बार फिर छलक उठा है। भोपाल में अपने किरार समाज के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साल 2023 की उस सियासी हलचल का जिक्र किया, जब बंपर जीत के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी उनके हाथ से फिसल गई थी। भावुक होकर उन्होंने बताया कि जब जीत के बाद डॉ. मोहन यादव का नाम सामने आया, तो उस वक्त उनके दिल पर क्या गुजर रही थी और उन्होंने खुद को कैसे संभाला।
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 230 में से 163 सीटें जीतकर इतिहास रचा था। लाडली बहना योजना का जादू चला और सबको लगा कि पांचवीं बार भी शिवराज ही शपथ लेंगे। लेकिन दिल्ली से फैसला कुछ और ही आया। शिवराज ने बताया कि वह पल उनके जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा थी। गुस्सा आ सकता था कि इतनी मेहनत के बाद नतीजा यह क्यों मिला, लेकिन उन्होंने अपने मन को समझाया कि यही धैर्य रखने का समय है और माथे पर शिकन तक नहीं आने दी।
शिवराज सिंह चौहान ने अखिल भारतीय किरार सम्मेलन में कहा कि जब यह तय हो गया कि अब मुख्यमंत्री मोहन यादव बनेंगे, तो उन्होंने अपने दिल से कहा कि शिवराज, यह तेरी परीक्षा की घड़ी है। इसके बाद उन्होंने खुद आगे बढ़कर मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें चार बार मुख्यमंत्री, छह बार सांसद और छह बार विधायक बनाया है, इससे ज्यादा और क्या चाहिए। अब उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में कृषि मंत्री के रूप में देश की सेवा करने का मौका मिला है, जिसे वे पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
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शिवराज सिंह चौहान के इस बयान पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि शिवराज जी बिल्कुल सही कह रहे हैं। भाजपा ने उन्हें दूल्हा बनाया, घोड़ी पर बैठाकर खूब घुमाया, लेकिन जब चुनाव के नतीजे आ गए और जीत मिल गई, तो घोड़ी पर डॉ. मोहन यादव को बैठा दिया। गौरतलब है कि शिवराज के लिए यह फैसला एक झटके जैसा था, जिसकी कसक आज भी उनके बयानों में कभी-कभी दिखाई दे जाती है।