खंडवा के श्री दादाजी वृद्धाश्रम की दर्दभरी दास्तान; अपनों से दूर जीवन बिता रहे हैं 23 बुजुर्ग

Khandwa Old Age Home: खंडवा के श्री दादाजी वृद्धाश्रम में जीवन बिताने को मजबूर 23 बेसहारा बुजुर्ग, पत्नी के निधन के बाद बेटे के गुजरात जाने से अकेले हुए मनोहरलाल हो या याददाश्त खो चुके भीकाजी।
Khandwa old age home elderly people abandoned by families
खंडवा वृद्धाश्रम में घर की तरह रह रहे वृद्ध जन(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Khandwa Elderly Care: उम्र के उस पड़ाव पर जब बुजुर्गों को अपनों के साथ और सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, कुछ बुजुर्ग परिवार से दूर वृद्धाश्रम में जीवन बिताने को मजबूर हैं। खंडवा स्थित श्री दादाजी वृद्धाश्रम में वर्तमान में 23 बुजुर्ग रह रहे हैं, जिनमें 11 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं। यहां रहने वाले बुजुर्ग एक-दूसरे का सहारा बनकर अपना समय गुजार रहे हैं।

वृद्धाश्रम में रहने वाले कई बुजुर्गों की कहानी अलग-अलग है। किसी का बेटा काम के लिए दूसरे राज्य चला गया, किसी की पत्नी नहीं रही तो परिवार से दूरी बढ़ गई, जबकि कुछ बुजुर्ग पारिवारिक परिस्थितियों के चलते यहां पहुंचे। हालांकि आश्रम में रहने के दौरान कई बुजुर्गों का परिवार से दोबारा संपर्क भी हुआ और कुछ का पुनर्वास परिवार में हुआ।

"बेटा गुजरात चला गया"

खिराला निवासी मनोहर रामलाल भावसार पिछले पांच साल से खंडवा जिले के इस वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि पत्नी के निधन के बाद बेटा काम के लिए गुजरात चला गया। बेटे की शादी नहीं हुई है और वह भी अकेला रहता है। परिवार में कोई अन्य सदस्य नहीं होने के कारण वे वृद्धाश्रम आ गए।

कुछ बुजुर्गों की याददाश्त कमजोर

महेश्वर निवासी भीकाजी पिछले छह साल से वृद्धाश्रम में हैं। सामाजिक कार्यकर्ता के मुताबिक उनकी याददाश्त कमजोर हो चुकी है। वे अपना नाम और गांव तो बता लेते हैं, लेकिन परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे पाते। परिजनों की तलाश के प्रयास किए गए, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली।

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जमनाबाई नातिन के साथ आईं, फिर यहीं रह गईं

बैतूल जिला के पाथरी निवासी जमनाबाई दो साल पहले वृद्धाश्रम आई थीं। वह अपनी बेटी, दामाद और नातिन के साथ खंडवा आई थीं। बाद में परिवार दूसरी जगह चला गया, लेकिन जमनाबाई यहीं रह गईं। उन्हें वृद्धाश्रम इतना पसंद आया कि वे वापस जाने के बजाय यहीं रहना चाहती हैं।

वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के लिए भोजन, रहने और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां रहने वाले बुजुर्गों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी की जाती है। उम्र के इस पड़ाव में अपनों से दूर रह रहे बुजुर्गों की कहानियां परिवार और समाज में बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती हैं।

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