MP Breaking: खंडवा में वन विभाग की टीम पर जानलेवा हमला! 8 से अधिक वनरक्षक खून से लथपथ, इलाके में भारी तनाव
Khandwa Forest Department Team: गुड़ी रेंज में हाल ही में वन विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर कई स्थानों से अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
- Reported By: नितिन झवर | Edited By: मनोज आर्या
घटनास्थल की तस्वीर, (सोर्स- नवभारत ब्यूरो)
Khandwa Forest Department Team Attacked: खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र के आम खुजली बीट में रविवार सुबह वन विभाग की स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉड पर अतिक्रमणकारियों द्वारा कथित रूप से जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। जंगल में गश्त के दौरान पहले से घात लगाए लोगों ने गोफन, पत्थरों और लाठियों से हमला कर दिया, जिसमें 8 से अधिक वनरक्षक घायल हो गए। कई कर्मचारियों को गंभीर चोटें आई हैं।
घायलों में वनरक्षक ज्वाला सिंह, रोमांक नायक, शैलेंद्र यादव, राजेंद्र सिंह सक्तावत, राजेंद्र बागड़ी, प्रदीप बघेल, चंद्रपाल तोमर और राहुल लोधी शामिल हैं। सभी को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। वन विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में भर्ती हुए 45 नवपदस्थ वनरक्षकों को प्रशिक्षण के बाद गुड़ी रेंज में तैनात किया गया था। यह विशेष टीम जंगल में अवैध अतिक्रमण रोकने और वन सुरक्षा के लिए नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान कथित अतिक्रमणकारियों ने सुनियोजित तरीके से हमला कर दिया।
अतिक्रमण हटाने के बाद बढ़ा था विवाद
बताया जा रहा है कि गुड़ी रेंज में हाल ही में वन विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर कई स्थानों से अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी वन अमले पर हमले हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।
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दो घंटे तक मदद नहीं मिलने का आरोप
घायल वन कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद समय पर मदद नहीं पहुंची। उनका कहना है कि वे करीब दो घंटे तक जंगल में घायल अवस्था में पड़े रहे। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि डायल-112 की टीम घटनास्थल पहुंचने के बावजूद पहले दूसरे पक्ष के घायलों को लेकर चली गई, जबकि वन कर्मचारियों को तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचाया गया।
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वन कर्मचारियों में आक्रोश
घटना के बाद वन कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, जंगल में अभियान के दौरान स्थायी पुलिस सुरक्षा और पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षा के अभाव में जंगल में ड्यूटी करना जोखिम भरा हो गया है। फिलहाल वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना ने वन अमले की सुरक्षा और जंगलों में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
