जेल से वकालतनामे दिलाने का हैरान करने वाला मामला, जिसे अधिवक्ता बताया वह निकला सरकारी स्कूल का गेस्ट लेक्चरर

Jabalpur High Court News : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जेल से वकालतनामे जारी होने का मामला सामने आया है। जिसे अधिवक्ता बताया गया वह रीवा का सरकारी स्कूल गेस्ट लेक्चरर निकला। कोर्ट ने जांच के निर्देश दिए।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्टफोटो सोर्स- सोशल मीडिया
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MP High Court Vakalatnama Case : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में जेलों से वकालतनामे जारी होने और कथित तौर पर बिचौलियों के जरिए इन्हें अधिवक्ताओं तक पहुंचाए जाने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने कई ऐसे तथ्य आए, जिनसे जेलों से वकालतनामे जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सुनवाई के दौरान सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि जिस नीरज कुमार साकेत को अधिवक्ता बताया गया था, वह वास्तव में रीवा जिले के एक शासकीय स्कूल में अंग्रेजी विषय के गेस्ट लेक्चरर ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत है। अधिवक्ता राम प्रकाश यादव की ओर से दाखिल शपथपत्र में नीरज कुमार साकेत को अधिवक्ता बताया गया था। हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया इस कथन को असत्य माना और मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

अलग-अलग जेल अधिकारियों से लिए गए करीब 30 वकालतनामे

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नीरज कुमार साकेत ने अधिवक्ता राम प्रकाश यादव के लिए करीब 30 वकालतनामे अलग-अलग जेल अधिकारियों से प्राप्त किए थे। इस तथ्य के सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर एक ऐसे व्यक्ति को अन्य आरोपियों के वकालतनामे लेने का अधिकार किस आधार पर मिला, जो अधिवक्ता के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

रीवा सेंट्रल जेल से 300 से ज्यादा वकालतनामे लेने का दावा

कोर्ट के सामने यह जानकारी भी रखी गई कि रीवा सेंट्रल जेल से अधिवक्ता राम प्रकाश यादव के लिए 300 से अधिक वकालतनामे प्राप्त किए गए। हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया नीरज कुमार साकेत की भूमिका को अधिवक्ता के लिए ‘टाउट’ यानी बिचौलिये के तौर पर देखे जाने की बात कही है। हालांकि कोर्ट ने इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

रिश्तेदारी के बावजूद दूसरे आरोपियों के वकालतनामे पर सवाल

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि नीरज साकेत और राजेंद्र साकेत के बीच रिश्तेदारी भी मान ली जाए, तब भी नीरज को अधिकतम राजेंद्र साकेत का वकालतनामा लेने का अधिकार हो सकता था। लेकिन अन्य आरोपियों के वकालतनामे लेने का अधिकार उसके पास कैसे था, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। कोर्ट ने इसी पहलू को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जांच करने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षा विभाग, जेल प्रशासन और बार काउंसिल करेगी जांच

हाईकोर्ट ने मामले की जांच तीन स्तरों पर कराने के निर्देश दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग नीरज कुमार साकेत के आचरण और पूरे मामले में उनकी भूमिका की जांच करेगा। जेल एवं सुधार प्रशासन रीवा सेंट्रल जेल के तत्कालीन अधीक्षक की भूमिका की जांच करेगा और यह देखा जाएगा कि वकालतनामे प्रमाणित करने से पहले आरोपियों और वकालतनामा लेने वाले व्यक्ति के संबंधों का पर्याप्त सत्यापन किया गया था या नहीं। वहीं मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल अधिवक्ता राम प्रकाश यादव के खिलाफ कथित टाउटिज्म और शपथपत्र में गलत जानकारी दिए जाने के आरोपों पर आवश्यक कार्रवाई करेगी।

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30 दिन में रिपोर्ट, अप्रैल में भी हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी

जबलपुर हाईकोर्ट ने तीनों संबंधित प्राधिकरणों को 30 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि इसी मामले में अप्रैल 2026 में भी हाईकोर्ट ने जेलों में वकालतनामा जारी करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने जेल प्रशासन को व्यापक जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा था। अब ताजा आदेश के बाद जांच में नीरज साकेत, संबंधित जेल अधिकारियों और अधिवक्ता राम प्रकाश यादव की भूमिका को लेकर सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।

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