OBC Reservation Case: 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण पर 15 जुलाई से रोजाना सुनवाई करेगा हाई कोर्ट, जल्द आ सकता है फैसला
MP High Court OBC Hearing : मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई 15 जुलाई से रोजाना होगी। हाईकोर्ट की नई बेंच सभी पक्षों की अंतिम दलीलें सुनेगी, जिसके बाद जल्द फैसला आने की संभावना है।
- Written By: प्रीतेश जैन
जबलपुर हाई कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
MP OBC Reservation Case: मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने इस मामले की सुनवाई अब डे-टू-डे यानी रोजाना आधार पर करने का निर्णय लिया है। इससे लंबे समय से लंबित इस प्रकरण में जल्द फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान नई खंडपीठ ने मामले की अगली तारीख निर्धारित की। यह मामला पहले तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा की बेंच के समक्ष सुनवाई में था। हाल ही में जस्टिस सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने के बाद अब इस मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ कर रही है।
15 जुलाई से रोजाना सुनवाई
नई बेंच ने स्पष्ट किया है कि 15 जुलाई से मामले की अंतिम सुनवाई शुरू होगी, जिसमें सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएंगी। अदालत ने यह भी संकेत दिए हैं कि अंतिम बहस पूरी होने के बाद मामले में जल्द निर्णय सुनाया जा सकता है।
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2019 में लिया था 27% आरक्षण का फैसला
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी करने का निर्णय वर्ष 2019 में लिया गया था। राज्य सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ओबीसी आरक्षण बढ़ने के बाद प्रदेश में कुल आरक्षण का प्रतिशत 63 फीसदी तक पहुंच जाता है, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 फीसदी की सीमा से अधिक है।
हाईकोर्ट ने लगा दी थी फैसले पर रोक
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। तब से यह मामला न्यायालय में लंबित है और लाखों अभ्यर्थी व सरकारी नौकरी के उम्मीदवार इसके अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
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जल्द आ सकता है मामले पर फैसला
अब 15 जुलाई से जबलपुर हाई कोर्ट में रोजाना सुनवाई तय होने के बाद प्रदेश के राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों की नजरें इस महत्वपूर्ण मामले पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस बहुप्रतीक्षित विवाद का कानूनी समाधान सामने आ सकता है।
