जबलपुर में सिस्टम के कदमों में लाड़ली बहना! दबंगों से बेटी को बचाने जनसुनवाई में मां कलेक्टर के कदमों में गिरी

Jabalpur News: जबलपुर जनसुनवाई में कलेक्टर के पैरों में गिरीं छेड़छाड़ पीड़िता मां-बेटी, घमापुर पुलिस ने भगाया था, अपर कलेक्टर ने दिए तत्काल केस दर्ज करने के निर्देश।
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जबलपुर में कलेक्टर के पैरों में गिरी महिला (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Jabalpur Collector Office Public Hearing: केंद्र सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। जिसका असर भी दिखता है लगातार महिलाओं को हर क्षेत्र में बढ़ावा मिल रहा है। बता दें कि, मध्य प्रदेश में सरकार लाड़ली बहना योजना चलाकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का दावा करती है लेकिन वंही दूसरी तरफ जबलपुर से ऐसी खबर आई है। जिसने सरकार के इस दावे पर सवाल खड़ा कर दिया है।

जी हां यह सवाल इन तस्वीरों को देखकर उठ रहा है जहां शक्ति का स्वरूप नारी जिले के सरकारी सिस्टम के मुखिया यानी कलेक्टर के चरणों में गिर गई और मदद की गुहार लगाने लगी। यह नजारा देख वहां मौजूद हर शख्स सकते में आ गया कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो एक महिला और उसकी बेटी को कलेक्टर के पैरों में गिरना पड़ा।

दबंगों ने किया परेशान पुलिस ने दुत्कार कर भगाया

दरअसल पूजा दुबे नामक महिला अपनी बेटी के साथ घमापुर थाना क्षेत्र के शीतलामाई इलाके में रहती हैं, जहां उनके घर के पीछे रहने वाला हनी बेन उनकी बेटी परी को आए दिन छेड़छाड़ कर परेशान करता है, बीते दिनों हनी ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर लड़की के साथ छेड़छाड़ करते हुए उसके कपड़े तक फाड़ दिए थे जिसके बाद परिवार को रोज धमकाया जा रहा था, पीड़ित परिवार ने थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई लेकिन जबलपुर पुलिस ने कार्यवाही नहीं की जब दोबारा शिकायत की तो पुलिस ने दुत्कार कर भगा दिया।

कलेक्टर ने तत्काल कार्यवाही करने दिए निर्देश

इस घटना के दौरान कलेक्टर ने मां बेटी को उठकर अपनी समस्या बताने के लिए कहा जिसके बाद तत्काल अपर कलेक्टर अभिषेक गहलोत ने पुलिस अधिकारियों से बात की और पीड़ित परिवार की शिकायत पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

हर जनसुनवाई में रिपीट हो रही शिकायतें

राज्य सरकार द्वारा जनसुनवाई शुरू की थी ताकि जिन पीड़ितों को संबंधित विभाग से मदद नहीं मिलती वे जनसुनवाई में पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी समस्या बता सकें लेकिन पिछले कई महीनों से जनसुनवाई भी औपचारिकता बनकर रह गई है, देखने में आ रहा है कि हर सप्ताह शिकायतें रिपीट हो रही हैं यानी शिकायतों का निराकरण नहीं हो रहा और पीड़ित को बार बार जनसुनवाई में पहुंचना पड़ता है।

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