जबलपुर-भोपाल हाईवे पर बना ब्रिज, 6 माह बाद महज 15 प्रतिशत सुधरा; पूरे मानसून ट्रैफिक रहेगा डायवर्टेड
Corruption In Bridge Construction: NH-45 शहपुरा ओवरब्रिज का काम केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने किया खारिज, ₹15 करोड़ की लागत से नए पिलर सिस्टम से बनेगा पुल, पूरे मानसून झेलना होगा डायवर्जन।
- Reported By: पवन पटेल | Edited By: सजल रघुवंशी
Bhopal Jabalpur Highway Bridge Construction (Source- Social Media)
Bhopal Jabalpur Highway Bridge Construction: भोपाल जबलपुर नेशनल हाईवे 45 का शहपुरा रेलवे ओवर ब्रिज का सुधार कार्य 6 महीने बाद भी पूरा नहीं हो पाया है, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा यह ब्रिज जबलपुर और भोपाल के बीच होने वाले आवागमन का सबसे मुख्यार्ग है लेकिन अब इस मार्ग को दोबारा जनता के लिए शुरू होने में करीब एक साल का वक्त और लगेगा।
एमपीआरडीसी के भ्रष्टाचार से निर्मित रेलवे ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त होने की पहली घटना करीब 7 माह पहले नवंबर में हुई थी जब ब्रिज का एक हिस्सा मिट्टीम धंसने की बजाय से एक तरफ की सड़क भी टूट गई थी, इसका निर्माण शुरू नहीं हो पाया और फरवरी 2026 में दोबारा ब्रिज की सपोर्टिंग वाल क्षतिग्रस्त हो गई।
सुधार कार्य बारिश से पहले करने के किए गए थे दावे
बाद में दावा किया गया कि बारिश के पहले पुल का सुधार कार्य पूरा कर लिया जाएगा और आम जनता के लिए रास्ता आसान होगा, लेकिन अब तस्वीरें बता रही हैं कि भ्रष्टाचार के बाद निर्माण कार्य में भी अव्वल दर्जे की लापरवाही बरती जा रही है। इसके अलावा ब्रिज के पुनर्निर्माण का खर्च भी अब 15 करोड रुपए से ज्यादा का होगा।
सम्बंधित ख़बरें
EXCLUSIVE: इंदौर में बिना भवन का ‘अदृश्य’ अस्पताल! 6 साल से कागजों पर तैनात हैं 87 डॉक्टर-नर्स
बालाघाट में 10 लाख की रंगदारी नहीं मिली तो प्लांट में आग लगा दी, 4 से 5 करोड़ का नुकसान; मामला दर्ज
‘चंदा चोर वर्जित…’, MP के पूर्व CM दिग्विजय सिंह के सरकारी आवास पर लगा पोस्टर; 2 अक्टूबर से करेंगे पदयात्रा
बालाघाट में मौत के मुहाने से लौटीं 16 जिंदगी; मूसलाधार बारिश के बीच हॉक फोर्स और SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन
जनता के टैक्स के करोड़ों रुपयों की चढ़ी बलि
एमपीआरडीसी की निगरानी में बांगड़ कंस्ट्रक्शन कंपनी ने जबलपुर से हिरन नदी के पुल तक करीब 55 किलोमीटर का हिस्सा 450 करोड रुपए की लागत से बनाया था। इसी हिस्से में शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज भी आता है लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही ने जनता की गाढ़ी कमाई से जमा होने वाले टैक्स के करोड़ों रुपयों की बलि चढ़ा दी।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने निर्माण प्रक्रिया को किया खारिज
रेलवे ओवरब्रिज का एक हिस्सा गिरने के बाद एमपीआरडीसी द्वारा फिर से काम शुरू करवाया गया और कहा गया कि बारिश शुरू होने के पहले ही सुधार कर पूरा कर लिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका, जिस प्रक्रिया से पुल का निर्माण किया जा रहा था केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने उस प्रक्रिया को खारिज कर दिया।
नए सिरे से ब्रिज बनाने का काम अब हुआ शुरू
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के एक्सपर्ट की सलाह पर नए सिरे से ब्रिज बनाने का काम चालू कर दिया गया है, ब्रिज के अप्रोच वाले हिस्से को पूरा हटाकर उसमें अभी बेस डाला जा रहा है। इसमें होने वाले कार्य की हर सप्ताह समीक्षा की जानी है। इसकी रिपोर्ट एमपीआरडीसी के मुख्यालय भोपाल में हर सप्ताह दी जाएगी। 400 मीटर का हिस्सा तकरीबन 15 करोड़ से निर्मित किया जाएगा जिसमें साइड और मिडिल में पिलर सिस्टम से स्ट्रक्चर बनाने की सलाह एक्सपर्ट ने दी है।
पूरे मानसून सीजन में डायवर्टेड रूट से संचालित होगा ट्रैफिक
जबलपुर भोपाल हाईवे-45 में शहपुरा के नजदीक ट्रैफिक अब पूरे मानसून सीजन में डायवर्टेड रूट से ही संचालित होगा, शहपुरा की कृषि उपज मंडी से आगे हाईवे तक जो परिवर्तित मार्ग है हर दिन 4000 से 5000 वाहन यहां से गुजरते हैं। इस मार्ग से संस्कारधानी को प्रदेश की राजधानी से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग दो किलोमीटर के एरिया में डायवर्टेड रूट से संचालित हो रहा है। शहपुरा टोल से इस मार्ग पर हर दिन 4 से 5 हजार कारें गुजरती हैं।
यह भी पढ़ें: EXCLUSIVE: इंदौर में बिना भवन का ‘अदृश्य’ अस्पताल! 6 साल से कागजों पर तैनात हैं 87 डॉक्टर-नर्स
इसके अलावा हैवी व्हीकल, गुड्स कैरियर और अन्य तरह के वाहन अलग हैं जिनसे नियम विरुद्ध तरीके से टोल भी वसूल किया जा रहा है। जबलपुर से राजधानी भोपाल के अलावा उज्जैन, देवास, इंदौर मालवा सहित अन्य शहरों तक जाने वाले भी इसी हाईवे का उपयोग करते हैं। अभी कुछ वाहन पाटन से शहपुरा और फिर वहां से भोपाल हाईवे तक पहुंच रहे हैं।
