बरगी हादसा: क्रूज के री-फिट पर 38 लाख खर्च फिर कैसे खराब हुआ इंजन? लापरवाही या भ्रष्टाचार, खड़े हो रहे सवाल

Bargi Cruise Engine Failure Case: बरगी डैम हादसे पर कई खुलासे हुए हैं। क्रूज पायलट के मुताबिक क्रूज का एक इंजन सही नहीं चल रहा था। ऐसे में री-फिट पर 38 लाख रुपए खर्च होने पर सवाल उठ रहे हैं।
Bargi Dam cruise accident Jabalpur
दुर्घटनाग्रस्त हुआ क्रूज (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Bargi Cruise Accident Case: बरगी क्रूज हादसे में इंजन खराबी के दावे के बाद लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्रूज के पायलट ने कहा कि उसका एक इंजन कम चल रहा था। ऐसे में क्रूज के री-फिट पर 38 लाख रुपए का खर्च भी अब जांच के दायरे में है।

बरगी डैम क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद अब तकनीकी खामियों और संभावित लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्रूज के पायलट महेश पायलट ने दावा किया है कि हादसे के वक्त एक इंजन धीमा चल रहा था। इस बयान ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही भ्रष्टाचार की आशंका को भी जन्म दे दिया है।

क्रूज पायलट के मुताबिक, क्रूज का एक इंजन पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि तीन साल पहले क्रूज की मरम्मत पर 38 लाख रुपए खर्च हुए थे, उसका क्या हुआ? वहीं, अब यह सवाल भी उठ रहा है कि 38 लाख रुपए आखिर किन कामों पर खर्च किए गए? अगर क्रूज हाल ही में री-फिट होकर सुरक्षित था तो फिर इंजन में खराबी कैसे आई? क्या मेंटेनेंस में लापरवाही हुई या भ्रष्टाचार ने 13 लोगों की जान ले ली?

मौसम के येलो अलर्ट की नहीं दी गई कोई जानकारी

क्रूज पायलट महेश पटेल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वापसी के दौरान अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और बांध में ऊंची लहरें उठने लगीं, जिससे क्रूज में पानी भरने लगा। उन्होंने किसी तरह उसे किनारे लाने की कोशिश की। पटेल ने बताया कि यात्रियों ने फोटो-वीडियो बनाने के चक्कर में लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि संचालन से पहले मौसम की कोई जानकारी नहीं दी गई और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई गलत है।

38 लाख का री-फिट, फिर भी हादसा?

पर्यटन निगम के सलाहकार और पूर्व नौसेना कमांडर राजेंद्र निगम ने दावा किया था कि साल 2024 में क्रूज का मीडियम री-फिट किया गया था, जिस पर करीब 38 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस दौरान इंजन, शॉफ्ट, हल समेत 17 अहम तकनीकी बदलाव किए गए थे। दावा किया गया कि इस प्रक्रिया के बाद क्रूज की उम्र 10 साल तक बढ़ गई थी और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप था। ऐसे में सवाल यह है कि फिर क्रूज का एक इंजन खराब कैसे हो गया?

जांच से पहले क्रूज तोड़ने पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर भी है कि हादसे के तुरंत बाद, जांच पूरी होने से पहले ही क्रूज को क्यों तोड़ दिया गया? जानकारों का मानना है कि इससे अहम तकनीकी सबूत नष्ट हो सकते हैं, जो हादसे के असली कारणों का पता लगाने में मदद करते। घटना के बाद से ही निष्पक्ष और तकनीकी जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

बिना बीमा के चल रहा था 20 साल पुराना क्रूज

बता दें 20 साल पुराना क्रूज बिना वैध बीमा के चल रहा था, जो केंद्र के कानून का उल्लंघन है। यही नहीं 200 रुपए टिकट लेने के बावजूद लोगों का भी बीमा नहीं था, जबकि दूसरे राज्यों में पांच लाख रुपए तक का बीमा टिकट के साथ किया जाता है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि मध्य प्रदेश में क्रूज के यात्रियों का बीमा क्यों नहीं किया जा रहा? जबलपुर के इस दर्दनाक क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत ने पर्यटन विभाग के पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 4 बच्चे, 8 महिलाएं और 1 पुरुष अपनी जान गंवा चुके हैं।

जांच समिति सभी पहलुओं पर जांच करेगा: मंत्री

वहीं, मामले में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी का कहना है कि जांच समिति बनी है। इस मामले में सभी पहलुओं पर जांच की जाएगी।

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