MP में ‘डिजिटल न्याय’ का नया दौर, कोर्ट से जमानत मिलते ही 10 मिनट में होगी रिहाई; 1 मिनट में मिलेगी ऑर्डर कॉपी
Madhya Pradesh News: एमपी में यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल लागू हो गया है। अब जमानत मिलने के 10 मिनट में रिहाई होगी और कोर्ट ऑर्डर की कॉपी 1 मिनट में वॉट्सऐप पर मिलेगी।
- Written By: सजल रघुवंशी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट डिजिटल रिफॉर्म (सोर्स- सोशल मीडिया)
Madhya Pradesh High Court Digital Reforms 2026: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था में बड़े डिजिटल बदलाव किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब लोगों को कोर्ट केस से जुड़ी जानकारी 24 घंटे उपलब्ध हो सकेगी, जबकि जरूरी दस्तावेजों के लिए किसी भी समय ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। प्रदेश में यह सुविधा यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल के तहत लागू की गई है, जिसका शुभारंभ 16 मई 2026, शनिवार को जबलपुर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने किया।
नई डिजिटल व्यवस्था में दावा किया गया है कि कोर्ट से जमानत आदेश जारी होने के बाद महज 10 मिनट के भीतर रिहाई की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। इसके अलावा किसी फैसले या आदेश की प्रमाणित कॉपी फीस जमा करते ही एक मिनट के भीतर वॉट्सऐप पर उपलब्ध कराई जाएगी।
नए सिस्टम के तहत गेमचेंजर साबित होगा AI
यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल के तहत अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो बड़े और जटिल मामलों की समरी स्वतः तैयार करेगी। इससे जजों और वकीलों को लंबी फाइलों का अध्ययन करने में कम समय लगेगा और मामलों की सुनवाई प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी। नई व्यवस्था में फॉरेंसिक तथा मेडिकल रिपोर्ट भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाएंगी, जिससे सभी जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे। इसके जरिए रिकॉर्ड में छेड़छाड़, दस्तावेज गायब होने और जानकारी में गड़बड़ी जैसी समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी, साथ ही न्यायिक प्रक्रिया मध्य प्रदेश में अधिक पारदर्शी बनेगी।
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अब देरी की समस्या खत्म
नई डिजिटल न्याय व्यवस्था में पुलिस, अदालत और जेल के सिस्टम को आपस में जोड़ा गया है, जिससे फाइलें अटकने, दस्तावेज गुम होने और प्रक्रियाओं में होने वाली देरी जैसी समस्याएं काफी हद तक कम होंगी। सभी विभागों के बीच जानकारी ऑनलाइन साझा होने से कामकाज अधिक तेज और पारदर्शी बनेगा।
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अपराधियों की ट्रैकिंग होगी बेहतर
इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी को एक यूनिक डिजिटल पहचान दी जाएगी, जिससे उसके केस, रिकॉर्ड और गतिविधियों की निगरानी आसान हो सकेगी। इस व्यवस्था से अपराधियों की ट्रैकिंग बेहतर होगी और जांच से लेकर सुनवाई तक की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सकेगी।
