कुर्ता-पायजामा पहनकर पूजा में शामिल हुए कलेक्टर और SP, भोजशाला में दूसरे दिन भी भव्य अनुष्ठान- देखें VIDEO

Dhar Bhojshala News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में पूजा-पाठ का सिलसिला लगातार जारी है। आज कलेक्टर और एसपी भी पूजा में शामिल हुए।
Dhar Bhojshala Second Day Puja Vagdevi Idol Installation Collector SP Attend
धार भोजशाला (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bhojshala Second Day Puja: भोजशाला में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूजा-पाठ का सिलसिला लगातार जारी है। रविवार सुबह दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ मां वाग्देवी की प्रतिमा सिर पर रखकर भोजशाला पहुंचे। यहां यज्ञशाला को सजाने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किया गया तथा मां वाग्देवी (सरस्वती माता) की प्रतीकात्मक प्रतिमा स्थापित की गई।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने शनिवार को नया निर्देश जारी किया था, जिसके तहत भोजशाला में हिंदू समाज को बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश और पूजा की अनुमति दी जा रही है।

पूजा में शामिल हुए कलेक्टर और एसपी

पूजा-अनुष्ठान कार्यक्रम में कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा भी कुर्ता-पायजामा पहनकर शामिल हुए। उनके साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद रहे। इससे पहले शनिवार को भी भारी संख्या में लोग भोजशाला पहुंचे थे और पूजा-अर्चना की थी।

नए निर्देश में भोजशाला को माना मां वाग्देवी का मंदिर

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद शनिवार शाम भोजशाला को लेकर नया आदेश जारी किया। इसके साथ ही साल 2003 में जारी अपना पुराना आदेश भी निरस्त कर दिया गया। एएसआई ने अपने नए आदेश में धार भोजशाला को देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर और एक संरक्षित स्मारक बताया है।

एएसआई के पुराने आदेश में क्या था?

बता दें कि, एएसआई ने साल 2003 में विवाद के दौरान एक आदेश जारी किया था, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को सीमित रूप से पूजा और नमाज की अनुमति दी गई थी। उस आदेश के अनुसार हिंदू समाज को केवल मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा-पाठ की अनुमति थी, जबकि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।

जब एक साथ था जुम्मा और बसंत पंचमी

धार भोजशाला को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया, जब इस वर्ष 23 जनवरी 2026 को जुम्मा और बसंत पंचमी एक ही दिन पड़ गए। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। सुनवाई के दौरान 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज का समय दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक निर्धारित किया था। वहीं, पूजा-पाठ के लिए कोई तय समय सीमा नहीं रखी गई थी बल्कि उसके लिए अलग स्थान निर्धारित किया गया था।

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