

Verma Commission Security Recommendations: राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा सामने आया है। कार्यक्रम स्थल आईडीए भूमि, रीजनल पार्क के सामने तय किया गया है।
पुलिस ने कार्यक्रम को लेकर आयोजकों के सामने सुरक्षा से जुड़े कई बिंदु रखे हैं। पुलिस के दस्तावेज में राहुल गांधी की सुरक्षा श्रेणी Z+ बताई गई है। खास बात यह है की पुलिस ने वर्मा आयोग की सिफ़ारिशो का हवाला दिया है ।
पुलिस की ओर से राहुल गांधी के कार्यक्रम की सुरक्षा को लेकर राजीव गांधी हत्याकांड के बाद वर्मा आयोग की रिपोर्ट में सामने आई सुरक्षा संबंधी सिफारिशों का हवाला दिया गया है। इसी संदर्भ में बड़े राजनीतिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास, मंच के आसपास सुरक्षा घेरा और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी जैसे इंतजामों को अहम बताया गया है।
पुलिस ने आयोजकों से कार्यक्रम में आने वाली भीड़ की वास्तविक संख्या का लिखित शपथ-पत्र मांगा है। इसमें पुरुषों और छात्राओं की संख्या अलग-अलग बतानी होगी। पुलिस के मुताबिक स्थल की क्षमता से अधिक लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी और क्षमता पूरी होने पर प्रवेश रोकने का अधिकार पुलिस के पास रहेगा।
सुरक्षा प्लान में पूरी भीड़ को अधिकतम 2 हजार लोगों की क्षमता वाले अलग-अलग सेक्टर में बांटने की बात कही गई है। प्रत्येक सेक्टर के लिए अलग प्रभारी होगा। इसके अलावा प्रवेश द्वार से मंच तक करीब 6 मीटर चौड़ा आपातकालीन कॉरिडोर खाली रखना होगा, ताकि एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की आवाजाही में बाधा न आए।
जस्टिस वर्मा आयोग की रिपोर्ट में 21 मई 1991 की घटना का जिक्र करते हुए वीआईपी सुरक्षा वाले आयोजनों में आयोजकों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस के साथ समन्वय, कार्यक्रम स्थल के चयन, बैरिकेडिंग, भीड़ नियंत्रण, एक्सेस कंट्रोल और पास वितरण में लापरवाही जैसे बिंदुओं को महत्वपूर्ण माना गया था। रिपोर्ट के अनुसार वीआईपी की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बल्कि आयोजकों की भी जवाबदेही है। इसी संदर्भ में बड़े आयोजनों में सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन होने पर आयोजकों की जिम्मेदारी तय करने की बात सामने आती है।