मेजर हमजा को दी गई अंतिम विदाई (फोटो सोर्स- नवभारत) 
इंदौर

इंदौर ने नम आंखों से दी मेजर हमजा आरिफ को अंतिम विदाई, सैन्य सम्मान के साथ हुए सुपुर्द-ए-खाक

Indore News : जैसलमेर सड़क हादसे में शहीद हुए मेजर हमजा आरिफ को इंदौर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया।

प्रीतेश जैन

Major Hamza Arif Funeral Indore : राजस्थान के जैसलमेर में सड़क हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के मेजर हमजा आरिफ को रविवार को उनके गृह नगर इंदौर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनका पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के साथ इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंचा, जहां सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम विदाई के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा और हर आंख नम दिखाई दी।

अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया, जब मेजर हमजा आरिफ की पत्नी ज्योति अरोरा अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि देते हुए खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। इस दौरान उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सेना के अधिकारियों ने वह तिरंगा उनकी पत्नी को सौंपा, जिसमें लिपटकर मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर इंदौर पहुंचा था। तिरंगे को सीने से लगाए खड़ी पत्नी की आंखों में अपार दुख के साथ अपने सैनिक पति पर गर्व भी साफ दिखाई दे रहा था।

सेना ने दी अंतिम सलामी

इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान में सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद मेजर हमजा आरिफ को अंतिम सलामी दी गई और धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों ने "भारत माता की जय" और "मेजर हमजा आरिफ अमर रहें" के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

मेजर हमजा आरिफ की अंतिम यात्रा में राजस्थान और मध्य प्रदेश से सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कर्नल, लेफ्टिनेंट और मेजर रैंक के अधिकारियों ने अपने साथी अधिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा बोहरा समाज के बड़ी संख्या में लोग, शहरवासी, परिजन और मित्र भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। सभी ने अपने वीर बेटे को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

कर्तव्यनिष्ठ और मिलनसार अधिकारी के रूप में थी पहचान

मेजर हमजा आरिफ को जानने वाले लोग उन्हें सरल, मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में याद कर रहे हैं। उनके पिता फकरुद्दीन आरिफ, दोस्तों और समाज के लोगों ने कहा कि उन्होंने हमेशा देश सेवा को सर्वोपरि रखा। उनके निधन से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरा शहर और सेना ने एक बहादुर अधिकारी को खो दिया है।

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