Special: इंदौर में दशहरे पर रावण दहन नहीं, होती है पूजा-अर्चना, पुजारी बोले- पुतले जलाने की जगह बुराई से लड़ें

Indore Dussehra: इंदौर के रावण मंदिर में दशहरे पर रावण दहन के बजाय पूजा-अर्चना, यज्ञ, हवन और कन्या पूजन होता है। पुजारी ने रावण दहन की परंपरा पर सवाल उठाते हुए सामाजिक बुराइयों को दूर करने की अपील की।
Ravan temple in Indore where devotees perform worship
इंदौर का रावण मंदिरफोटो सोर्स- नवभारत
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Highlights:

  • इंदौर के अर्जुन सिंह गोहर नगर स्थित रावण मंदिर में दशहरे पर पूजा-अर्चना होती है।

  • मंदिर का निर्माण 10 अक्टूबर 2010 को हुआ था, जबकि पुजारी का परिवार 1967 से रावण की पूजा कर रहा है।

  • विजयादशमी पर यज्ञ, हवन और कन्या पूजन किया जाता है।

  • पुजारी महेश गोहर ने रावण दहन के बजाय पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक बुराइयों पर ध्यान देने की अपील की।

  • महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने दुर्योधन और दुशासन के पुतले नहीं जलाए जाने पर भी सवाल किया।

Indore Ravan Temple : देशभर में विजयादशमी पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। वहीं, इंदौर में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां दशहरे पर रावण दहन के बजाय पूजा-अर्चना की जाती है। अर्जुन सिंह गोहर नगर स्थित रावण मंदिर में रावण को प्रकांड विद्वान और भगवान शिव का अनन्य भक्त मानकर याद किया जाता है।

मंदिर के पुजारी महेश गोहर का कहना है कि रावण के व्यक्तित्व को केवल बुराई के प्रतीक के रूप में नहीं देखना चाहिए। वह रावण दहन की परंपरा के बजाय समाज की बुराइयों को दूर करने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हैं।

2010 में हुआ था रावण मंदिर का निर्माण

मंदिर के पुजारी महेश गोहर के मुताबिक, अर्जुन सिंह गोहर नगर स्थित रावण मंदिर का निर्माण 10 अक्टूबर 2010 को सुबह 10 बजकर 10 मिनट और 10 सेकंड पर हुआ था। उनका परिवार वर्ष 1967 से रावण की पूजा करता आ रहा है। महेश गोहर बताते हैं कि बचपन में मंदसौर के रिछाड़िया गांव में रावण की पूजा होते देखकर उनके मन में इस परंपरा को जानने की जिज्ञासा पैदा हुई। इसके बाद उन्होंने रावण के इतिहास और उनसे जुड़ी मान्यताओं का अध्ययन शुरू किया।

रावण को विद्वान और शिव भक्त के रूप में याद करते हैं

महेश गोहर का मानना है कि रावण को केवल बुराई के प्रतीक के रूप में देखना उसके व्यक्तित्व के दूसरे पहलुओं की अनदेखी करना है। वह रावण संहिता का उल्लेख करते हुए रावण को विद्वान और आयुर्वेद संबंधी ज्ञान रखने वाले व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं। हालांकि, रावण के जीवन और उनसे जुड़ी मान्यताओं को लेकर अलग-अलग धार्मिक और ऐतिहासिक मत प्रचलित हैं। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि रावण के व्यक्तित्व का आकलन एक ही नजरिए से नहीं किया जाना चाहिए।

दशहरे पर यज्ञ, हवन और कन्या पूजन

मंदिर में विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन के बजाय धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दौरान यज्ञ, हवन और कन्या पूजन किया जाता है। पुजारी महेश गोहर दशहरे को रावण के मोक्ष दिवस के रूप में मनाने की अपील करते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है। इस तरह यहां विजयादशमी पारंपरिक रावण दहन से अलग धार्मिक और सामाजिक विचारों के साथ मनाई जाती है।

रावण दहन पर सवाल, पर्यावरण संरक्षण की दी दलील

महेश गोहर रावण दहन की परंपरा पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि पुतले जलाने से प्रदूषण बढ़ता है। उनके अनुसार, समाज को प्रतीकात्मक रूप से पुतले जलाने के बजाय बुराइयों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। वह पर्यावरण संरक्षण के साथ महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाते हैं। उनका कहना है कि यदि महिला के अपमान के कारण रावण का पुतला जलाया जाता है, तो महाभारत में द्रौपदी के अपमान के लिए जिम्मेदार दुर्योधन और दुशासन के पुतले क्यों नहीं जलाए जाते।

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अलग परंपरा के जरिए सामाजिक बुराइयों पर विचार की अपील

इंदौर का यह रावण मंदिर विजयादशमी पर एक अलग परंपरा प्रस्तुत करता है। यहां रावण दहन के बजाय पूजा-अर्चना के जरिए उसके विद्वतापूर्ण व्यक्तित्व को याद किया जाता है। मंदिर के पुजारी का जोर इस बात पर है कि दशहरे का संदेश केवल पुतला दहन तक सीमित न रहे, बल्कि समाज में मौजूद बुराइयों को दूर करने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्रयास किए जाएं।

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