MP : विदिशा के रावण गांव में दशहरे पर नहीं होता रावण दहन, 'रावण बाबा' की होती है विशेष पूजा

Vidisha Ravana Village: विदिशा जिले की नटेरन तहसील में स्थित रावन गांव की अनोखी परंपरा। यहां रावण को ग्राम देवता और इष्ट देव मानते हैं। ग्रामीण शुभ कार्यों से पहले लेते हैं 'रावण बाबा' का आशीर्वाद।
MP Vidisha Ravana Village
विदिशा के रावण गांव में दशहरे पर नहीं होता रावण दहनफोटो सोर्स - सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights :

  • एमपी के विदिशा जिले के रावण गांव में दशहरे पर रावण दहन नहीं होता।

  • गांव के लोग रावण को ग्राम देवता और इष्ट देव मानकर 'रावण बाबा' के रूप में पूजते हैं।

  • मंदिर में रावण बाबा की करीब 12 फीट लंबी लेटी हुई प्रतिमा विराजमान है।

  • शादी का पहला निमंत्रण कार्ड रावण बाबा को अर्पित करने की परंपरा है।

  • नए वाहन और अन्य शुभ कार्यों से पहले भी रावण बाबा की पूजा की जाती है।

Dussehra Festival : देशभर में विजयादशमी पर बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण के पुतले जलाए जाते हैं लेकिन मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां दशहरे पर रावण दहन नहीं होता।

नटेरन तहसील के रावन गांव में रावण बाबा की पूजा-अर्चना की जाती है। यहां के ग्रामीण रावण को केवल रामायण का पात्र नहीं बल्कि अपना ग्राम देवता और इष्ट देव मानते हैं। यही परंपरा इस गांव को अलग पहचान देती है।

मंदिर में विराजमान है रावण बाबा की विशाल प्रतिमा

गांव के बीचों-बीच परमार कालीन प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां रावण बाबा की लगभग 12 फीट लंबी प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में विराजमान है। मंदिर में सुबह और शाम विधि-विधान से आरती और पूजा होती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार रावण बाबा की कृपा से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है और शुभ कार्य निर्विघ्न पूरे होते हैं।

शादी से लेकर नए वाहन तक, पहले रावण बाबा का पूजन

विदिशा जिले के रावन गांव में किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत रावण बाबा की पूजा से करने की परंपरा है। विवाह के समय शादी का पहला निमंत्रण कार्ड मंदिर में अर्पित किया जाता है। तेल-हल्दी का न्योता भी सबसे पहले रावण बाबा को दिया जाता है। नए वाहन की खरीद और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों से पहले भी उनका आशीर्वाद लिया जाता है। ग्रामीणों का विश्वास है कि रावण बाबा की पूजा के बिना शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

युवाओं में भी दिखती है रावण बाबा के प्रति आस्था

गांव में रावण बाबा के प्रति श्रद्धा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ ब्राह्मण परिवार स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं। गांव के कई युवा अपनी गाड़ियों पर ‘जय लंकेश’ लिखवाते हैं और शरीर पर रावण बाबा के नाम या चित्र के टैटू बनवाते हैं। इस तरह यहां की परंपरा नई पीढ़ी में भी दिखाई देती है।

दशहरे पर रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और भंडारा

दशहरा पर्व के दिन गांव में रावण दहन के बजाय विशेष पूजा-अर्चना, रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और महाभंडारे का आयोजन किया जाता है। गांव के लोग मंदिर पहुंचकर दर्शन करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। विदिशा, भोपाल और आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु रावण बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

MP Vidisha Ravana Village
खंडवा में रावण के पुतले पर महंगाई की मार, 1500 रुपये वाला पुतला अब 2000 के पार

ग्रामीणों के लिए ग्राम देवता हैं रावण बाबा

मंदिर के पुजारी नरेश तिवारी के अनुसार, रावण बाबा प्राचीन काल से यहां विराजमान हैं और ग्रामीण उन्हें अपना ग्राम देवता मानते हैं। वहीं सरपंच प्रतिनिधि राजेश धाकड़ बताते हैं कि रावण बाबा की प्रतिमा ही गांव की प्रमुख पहचान है। ग्रामीण गोविंद नारायण तिवारी के मुताबिक, गांव के लोग रावण दहन देखने भी नहीं जाते। उनके लिए दशहरा रावण बाबा की भक्ति, परंपरा और सामूहिक आस्था का पर्व है।

Navbharat Live
navbharatlive.com