

Rahul Gandhi Students Ki Goonj : इंदौर में 19 सितंबर 2026 को प्रस्तावित राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय प्रशासन से विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवश्यक शैक्षणिक छूट देने की मांग की है। इस संबंध में कुलगुरु राकेश सिंघई के नाम एग्जाम कंट्रोलर को ज्ञापन सौंपा गया।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व संभागीय प्रवक्ता विवेक खंडेलवाल और ब्लॉक-14 शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गिरीश जोशी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से 19 सितंबर को विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में अवकाश घोषित करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि अवकाश देना संभव नहीं है तो कार्यक्रम में शामिल होने वाले इच्छुक विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों और उपस्थिति में पूर्ण छूट दी जाए।
विवेक खंडेलवाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कुलगुरु आरएसएस, भाजपा और एबीवीपी से जुड़े कार्यक्रमों में उपस्थित होकर अध्यक्षता और सहभागिता कर सकते हैं, तो विद्यार्थियों के ‘छात्रों की गूंज’ संवाद कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सहयोग देने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसी राजनीतिक विचारधारा का केंद्र नहीं, बल्कि शिक्षा, संवाद, विचार और लोकतांत्रिक सहभागिता का संस्थान है।
खंडेलवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर समान और निष्पक्ष रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 19 सितंबर को अवकाश या आवश्यक शैक्षणिक छूट देना विद्यार्थियों के हित में होगा। कांग्रेस नेता के मुताबिक, मुद्दा राहुल गांधी के कार्यक्रम का नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की निष्पक्षता का है और विद्यार्थियों को अपनी पसंद के सार्वजनिक संवाद में शामिल होने का समान अवसर मिलना चाहिए।
ज्ञापन में तक्षशिला परिसर के सभी स्कूलों, विभागों और केंद्रों के साथ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन के साथ समन्वय करने की बात कही गई है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सहभागिता पूरी तरह स्वैच्छिक होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विद्यार्थियों के हित में विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए। उनका कहना है कि जो विद्यार्थी कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें अपनी इच्छा से वहां जाने का अवसर मिले और इसके कारण उनकी पढ़ाई अथवा उपस्थिति प्रभावित न हो।