ब्रिक्स कृषि सम्मेलन: ग्रामीण हाट बाज़ार में मध्यप्रदेश की कृषि विरासत से रूबरू हुए विदेशी मेहमान
Indore BRICS Conference:ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दौरान इंदौर के ग्रामीण हाट पहुंचे विदेशी प्रतिनिधि मध्यप्रदेश की कृषि विविधता, श्रीअन्न, हस्तशिल्प और ग्रामीण उद्यमिता मॉडल से प्रभावित हुए ।
- Reported By: अंशुल मुकाती
ग्रामीण हाट बाज़ार में जानकारी लेते ब्रिक्स के मेहमान (फोटो सोर्स - नवभारत)
Indore BRICS Agriculture Summit: ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के तहत इंदौर के प्रसिद्ध ग्रामीण हाट में मंगलवार को विदेशी प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश की कृषि, संस्कृति और ग्रामीण उद्यमिता का अनूठा संगम देखा। मेरा युवा भारत और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भ्रमण में ब्रिक्स देशों के मेहमानों ने प्रदेश के ओडीओपी उत्पादों, श्रीअन्न, हस्तशिल्प और स्थानीय नवाचारों का अवलोकन किया। प्रतिनिधियों ने ग्रामीण हाट को कृषि समृद्धि और सतत विकास का उत्कृष्ट मॉडल बताया।
मालवा की परंपरा से हुआ स्वागत
ग्रामीण हाट पहुंचने पर विदेशी मेहमानों का मालवा की पारंपरिक पगड़ी पहनाकर और जनजातीय लोक नृत्य के साथ स्वागत किया गया। लोक कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने मेहमानों का मन मोह लिया। कई प्रतिनिधि ढोल और मंजीरे की थाप पर कलाकारों के साथ नृत्य करते नजर आए और मालवा की संस्कृति का आनंद लिया।
ओडीओपी उत्पाद और कृषि विविधता ने खींचा ध्यान
हाट में प्रदर्शित मध्यप्रदेश के ओडीओपी उत्पाद विदेशी मेहमानों के आकर्षण का केंद्र रहे। बुरहानपुर के केले से बने चिप्स, कुकीज़ और केले के रेशों से तैयार वस्त्रों को प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से सराहा। वहीं, रीवा के जीआई टैग सुंदरजा आम और बालाघाट के प्रसिद्ध चिन्नौर चावल का स्वाद लेकर उन्होंने प्रदेश की कृषि विविधता की प्रशंसा की।
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श्रीअन्न और जैव विविधता की हुई सराहना
झाबुआ की साठी मक्का और दूध मोगर मक्का के साथ मंडला की मिलेट क्वीन लहरी बाई द्वारा संरक्षित दुर्लभ श्रीअन्न की किस्मों ने ब्रिक्स देशों के कृषि विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा नीमच की औषधीय फसलें, नरसिंहपुर का करेली गुड़ और छिंदवाड़ा के वन उत्पादों की भी जानकारी प्रतिनिधियों को दी गई।
हस्तशिल्प और महिला समूहों के मॉडल से हुए प्रभावित
ग्रामीण हाट के वस्त्र एवं हस्तशिल्प अनुभाग में मृगनयनी के चंदेरी, महेश्वरी और कोसा वस्त्र, बाघ प्रिंट तथा गोंड कला को ब्रिक्स में आये विदेशी मेहमानों ने खूब सराहा। प्रकृत सिल्क के तसर और मलबरी सिल्क उत्पादों के साथ हेम्प क्लोदिंग के कम पानी में तैयार होने वाले टिकाऊ वस्त्रों में भी उन्होंने रुचि दिखाई। महिला स्व-सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों से संवाद कर उनके मूल्य संवर्धन और आजीविका मॉडल की भी प्रशंसा की।
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ग्रामीण विकास मॉडल को अपने देशों में अपनाने की जताई इच्छा
भ्रमण के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों ने पारंपरिक खाटों पर बैठकर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया और मालवा के ग्रामीण आतिथ्य की सराहना की। उन्होंने ग्रामीण हाट को मध्यप्रदेश की कृषि समृद्धि, स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन और सतत विकास का उत्कृष्ट मंच बताते हुए कहा कि ऐसे मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कई प्रतिनिधियों ने इस तरह की पहल को अपने देशों में अपनाने की इच्छा भी व्यक्त की।
