

MP Poltical News : मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के मामले में आज 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इससे पहले उन्हें एक अहम कानूनी आधार मिला है, जिसका इस्तेमाल वे अपने पक्ष में कर सकती हैं।
मामले में निर्मला सप्रे तर्क दे सकती हैं कि वे अब भी कांग्रेस में हैं और उन्होंने भाजपा जॉइन नहीं की है। यह स्थिति कांग्रेस के एक कदम से पैदा हुई है, जिसके चलते कांग्रेस खासतौर पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को कोर्ट में झटका लग सकता है।
दरअसल 27 अप्रैल को मप्र विधानसभा के विशेष सत्र के लिए कांग्रेस ने विधायकों को ईमेल के जरिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया था। यह ईमेल निर्मला सप्रे को भी भेजा गया था। इसमें निर्देश था कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संकल्प प्रस्ताव पर वोटिंग होने पर विधायक पार्टी के पक्ष में मतदान करें।
व्हिप के 2 मकसद थे- संकल्प पर वोटिंग से एकजुटता दिखाना और सप्रे के अलग वोट करने पर उन्हें भाजपा के साथ बताना। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह व्हिप सप्रे के पक्ष में कानूनी आधार बन सकता है। वे तर्क दे सकती हैं कि व्हिप से स्पष्ट है कि कांग्रेस उन्हें अपना विधायक मानती है और उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है और कांग्रेस के पास अब तक दल-बदल का ठोस प्रमाण भी नहीं है।
31 मार्च की सुनवाई में सप्रे ने कोर्ट में कहा था कि वे अब भी कांग्रेस में हैं, जिसे रिकॉर्ड में लिया गया था। कोर्ट ने उमंग सिंघार से सप्रे के बीजेपी में शामिल होने के ठोस सबूत मांगे थे। इस पर सिंघार पक्ष ने सोशल मीडिया पोस्ट और तस्वीरों का हवाला दिया था, लेकिन कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना और 9 अप्रैल तक प्रमाणिक साक्ष्य पेश करने को कहा था। इस पर सिंघार ने व्हिप की प्रतियां सबूत के तौर पर देने की बात कही थी।
दरअसल, कांग्रेस ने यह व्हिप एक खास रणनीति के तहत जारी किया था। पार्टी की मंशा थी कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सरकार के संकल्प प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान यदि निर्मला सप्रे अलग मतदान करती हैं, तो उन्हें भाजपा के साथ खड़ा दिखाया जा सके। इससे दलबदल का आरोप मजबूत करने की योजना थी, लेकिन वोटिंग की स्थिति बनी ही नहीं और विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। यही कारण है कि Congress की यह रणनीति अब उल्टी पड़ती दिख रही है।