पहले की बात फिर जिता विश्वास और लूटे 8 लाख; बेंगलुरू की ‘सोनिया’ के जाल में फंसा ग्वालियर का किराना कारोबारी
Shopkeeper Trapped In Cyber Fraud: ग्वालियर में साइबर ठगों का बड़ा हमला, फेसबुक पर सोनिया बनकर किराना व्यापारी से ट्रेडिंग ऐप के नाम पर ₹8.20 लाख की ठगी, यहां जानें पूरा मामला।
- Written By: सजल रघुवंशी
प्रतीकात्मक इमेज (सोर्स- सोशल मीडिया)
Gwalior Cyber Fraud Case: ग्वालियर में साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। मई माह के अंतिम दिन साइबर अपराधियों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कई लोगों को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। एक ही दिन में ऑनलाइन धोखाधड़ी के आठ से अधिक मामले सामने आने से पुलिस और आमजन की चिंता बढ़ गई है।
सबसे बड़ा मामला जनकगंज थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ, जहां एक किराना व्यापारी को फेसबुक पर युवती से दोस्ती कराने के बहाने जाल में फंसाया गया। इसके बाद ठगों ने ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर उससे करीब सवा आठ लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित को अधिक मुनाफे का लालच देकर एक ट्रेडिंग ऐप से जोड़ा गया और धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करवा ली गई। शहर के विभिन्न थानों में ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े कुल आठ प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनकी जांच साइबर पुलिस द्वारा की जा रही है।
फेसबुक पर बेंगलुरू की सोनिया बनकर की ठगी
जनकगंज थाना पुलिस के अनुसार, भूरे बाबा की बस्ती, छत्री बाजार निवासी शैलेंद्र उपाध्याय सिकंदर कंपू क्षेत्र में किराना और जनरल स्टोर का संचालन करते हैं। सितंबर 2025 में उनकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सोनिया शर्मा नाम की एक प्रोफाइल से पहचान हुई। बातचीत के दौरान महिला ने खुद को बेंगलुरु निवासी और एक बड़ी गारमेंट फैक्ट्री की संचालक बताया।
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ट्रेडिंग ऐप के नाम पर डाउनलोड कराया फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म
धीरे-धीरे विश्वास कायम करने के बाद उसने शैलेंद्र को ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का झांसा दिया। इसके बाद उसने एक लिंक भेजकर उनके मोबाइल में कथित ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया, जिसके माध्यम से निवेश के नाम पर उनसे रकम जमा करवाई गई। बाद में उन्हें पता चला कि यह पूरा निवेश प्लेटफॉर्म फर्जी था और उनके साथ साइबर ठगी की गई है।
पहले कमवाए 20 हजार फिर लूटे सवा आठ लाख
शुरुआत में शैलेंद्र ने परीक्षण के तौर पर 10 हजार रुपये निवेश किए, जिस पर ऐप में 15 हजार रुपये का रिटर्न दिखाई दिया। इसके बाद 20 हजार रुपये लगाने पर 60 हजार रुपये का लाभ दिखाया गया। लगातार बढ़ते हुए इस कथित मुनाफे को वास्तविक समझकर शैलेंद्र का भरोसा बढ़ता गया।
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अधिक कमाई की उम्मीद में उन्होंने अपनी जमा पूंजी से अलग-अलग चरणों में कुल 8 लाख 20 हजार रुपये निवेश कर दिए। बाद में उन्हें पता चला कि ऐप पर दिखाया जा रहा लाभ पूरी तरह फर्जी था और वे साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।
