

Guna MLA Pannalal Shakya Controversial Statement: मध्य प्रदेश के गुना में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय बलराम महोत्सव के दौरान भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य के एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाक्य ने रामायण, महाभारत और ऐतिहासिक युद्धों का उदाहरण देते हुए महिलाओं के बलिदान को लेकर टिप्पणी की।
उन्होंने माता सीता का संदर्भ देते हुए उन्हें कथित तौर पर ‘मौत का सामान’ बताया। शाक्य ने कहा कि रामायण, महाभारत और अन्य युद्धों में पुरुष मारे गए, जबकि एक भी महिला नहीं मरी। उनके इस बयान पर मंच पर मौजूद चांचौड़ा विधायक प्रियंका पेंची ने तत्काल आपत्ति जताई।
पन्नालाल शाक्य ने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण को उसके भाई ने समझाया था कि किसी पराई स्त्री को अपने साथ ले जाना गलत है। उन्होंने कहा कि उसे सम्मान के साथ वापस भेज देना चाहिए, क्योंकि यह ‘मौत का सामान’ है। इसके बाद उन्होंने रामायण के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें किसी महिला की मौत नहीं हुई, बल्कि पुरुष ही मारे गए। शाक्य ने अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए महाभारत का उदाहरण दिया और दावा किया कि युद्ध में एक करोड़ पुरुष मारे गए, जबकि महिलाएं नहीं मरीं। उन्होंने कहा कि इस बात को समझने की जरूरत है।
भाजपा विधायक ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि संयोगिता के कारण पृथ्वीराज चौहान के 55 सामंत कन्नौज से दिल्ली तक मारे गए। शाक्य ने कहा कि इन घटनाओं में भी पुरुषों की ही मौत हुई, महिलाओं की नहीं। उनके इस बयान के दौरान मंच पर मौजूद चांचौड़ा विधायक प्रियंका पेंची उन्हें रोकती हुई दिखाई दीं।
पन्नालाल शाक्य के बयान के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गईं, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए भाजपा पर निशाना साधा उन्होंने लिखा कि भाजपा विधायक ने माता सीता को कहा ‘मौत का सामान’। दिन-रात प्रभु श्री राम के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा का असली चरित्र यही है कि वह बस धर्म के नाम पर राजनीति करती है। माता सीता को ‘मौत का सामान’ कहना न केवल धार्मिक भावनाओं का मज़ाक उड़ाना है, बल्कि भगवान श्रीराम और हमारी माताओं-बहनों का भी अपमान है। पहले भगवान राम के घर में चोरी और अब माता सीता का अपमान। छोटी-छोटी बातों पर धार्मिक भावनाओं के आहत होने का मुद्दा उठाने वाली भाजपा अब क्यों चुप है?