डिंडौरी : 40 लाख रुपए में खरीदे गए कीड़ों को जलाया, कीटों ने 1.47 लाख पेड़ों को पहुंचाया नुकसान

Dindori Forest Department : डिंडौरी में करीब 40 लाख रुपए में खरीदे गए 19 लाख 47 हजार साल बोरर कीटों को वन विभाग ने आठ स्थानों पर नष्ट किया। कीटों से करीब 1.47 लाख साल के पेड़ प्रभावित हुए हैं।
Dindori Forest Department destroys 19.47 lakh sal borer insects
नष्ट किए गए 19.47 लाख कीटफोटो सोर्स- सोशल मीडिया
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Dindori Sal Borer Insect : डिंडौरी के वन क्षेत्रों में साल के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले साल बोरर कीटों के विनष्टीकरण की कार्रवाई की गई है। खास बात यह है कि जिन करीब 19 लाख 47 हजार साल बोरर कीटों को नष्ट किया गया, उन्हें करीब 40 लाख रुपए में खरीदा गया था। 24 सितंबर को जिले में अलग-अलग आठ संग्रहण केंद्रों पर वन विभाग की मौजूदगी में इन कीटों को नियमानुसार नष्ट किया गया।

वन क्षेत्रों से संग्रहित किए गए साल बोरर कीटों को अलग-अलग संग्रहण केंद्रों पर रखा गया था। अनुमति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 सितंबर को इनके विनष्टीकरण की कार्रवाई के लिए तारीख निर्धारित की गई। इसके बाद वन विभाग के अमले की मौजूदगी में वन ग्राम चौरादादर सहित जिले के आठ अलग-अलग स्थानों पर संग्रहित कीटों को नष्ट किया गया।

तीन वन परिक्षेत्रों में फैला प्रकोप

वन विभाग के अनुसार साल बोरर कीट का प्रकोप जिले के पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया और दक्षिण समनापुर वन परिक्षेत्र में सामने आया है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में साल के पेड़ प्रभावित हुए हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक करीब 1 लाख 47 हजार साल के पेड़ों को कीटों से नुकसान पहुंचा है। वहीं प्रभावित क्षेत्रों से करीब 19 लाख 47 हजार कीटों को संग्रहित किया गया था। इसके लिए कैंप लगाकर ग्रामीणों को 2 रुपये प्रति कीट दिए गए थे।

पेड़ों की छाल और लकड़ी को पहुंचाता है नुकसान

साल बोरर ऐसा कीट है, जिसका लार्वा साल के पेड़ों की छाल और लकड़ी के अंदर सुरंगनुमा रास्ते बनाकर पेड़ के अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआती दौर में पेड़ के बाहर इसका असर स्पष्ट दिखाई नहीं देता, लेकिन समय के साथ शाखाएं कमजोर होने लगती हैं। ज्यादा प्रकोप होने पर पेड़ के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

छेद और सूखने के निशान आते हैं नजर

प्रभावित साल के पेड़ों में छाल के आसपास छेद, कीटों के प्रवेश और निकास के निशान तथा लकड़ी के कमजोर होने जैसी स्थिति देखी जा सकती है। प्रकोप बढ़ने पर पेड़ सूख भी सकते हैं। बड़े स्तर पर कीटों के फैलाव से साल के प्राकृतिक जंगलों के स्वास्थ्य और उनके पुनर्जनन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

संक्रमण रोकने के लिए कीटों को किया गया नष्ट

डिंडौरी वन विभाग का कहना है कि संग्रहित कीटों के विनष्टीकरण का उद्देश्य उन्हें दोबारा फैलने से रोकना है। इसके साथ ही प्रभावित वन क्षेत्रों में साल के पेड़ों की स्थिति और कीटों की मौजूदगी पर लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग की ओर से कीटों की पहचान, संग्रहण और विनष्टीकरण के साथ प्रभावित इलाकों में आवश्यक वन प्रबंधन गतिविधियां भी की जा रही हैं।

एसडीओ ने बताया पूरी कार्रवाई का विवरण

वन विभाग डिंडौरी के एसडीओ शैलेन्द्र तिवारी ने बताया कि मुख्यालय स्तर से संग्रहित कीटों के विनष्टीकरण के लिए नियमानुसार अनुमति प्राप्त होने के बाद 24 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई थी। मुख्य वन संरक्षक जबलपुर और वन मंडल अधिकारी डिंडौरी की अनुमति के अनुरूप वन मंडल के अलग-अलग संग्रहण केंद्रों पर कार्रवाई की गई।

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19.47 लाख कीट और 1.47 लाख पेड़ प्रभावित

शैलेन्द्र तिवारी के अनुसार जिले में करीब 19 लाख 47 हजार साल बोरर कीटों के विनष्टीकरण की कार्रवाई की गई है। पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया और दक्षिण समनापुर वन परिक्षेत्र इस कीट के प्रकोप से प्रभावित हैं। इन तीनों क्षेत्रों में लगभग 1 लाख 47 हजार साल के पेड़ प्रभावित हुए हैं। अब वन विभाग की निगरानी इस बात पर रहेगी कि कीटों का प्रकोप दोबारा न बढ़े और प्रभावित साल के जंगलों को और नुकसान से बचाया जा सके।

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