भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद आज पहला शुक्रवार, हिंदू समाज करेगा हवन-पूजन और महाआरती, पुलिस बल तैनात

Maha Aarti at Bhojshala: धार भोजशाला पर HC के आदेश के बाद आज पहला शुक्रवार है। हिंदू समाज आज दोपहर 1 से 3 बजे तक हवन-पूजन और महाआरती करेगा। सुरक्षा के लिए पूरे धार में 2000 जवान तैनात किए गए हैं।
Dhar Bhojshala Temple News
धार भोजशाला (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Dhar Bhojshala Temple: भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के फैसले के बाद आज पहला शुक्रवार बेहद अहम माना जा रहा है। 15 मई को हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद हिंदू समाज आज दोपहर 1 से 3 बजे तक हवन-पूजन और महाआरती करेगा।

भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि इस अवसर पर शोभायात्रा निकालने की भी तैयारी थी, लेकिन कुछ कारणों से उसे रद्द कर दिया गया।

अलर्ट पर 2 हजार जवान तैनात

धार की भोजशाला में महाआरती के मद्देनजर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। करीब दो हजार पुलिसकर्मी और अधिकारी शहरभर में तैनात किए गए हैं। सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए विशेष टीम भी बनाई गई है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा के नेतृत्व में गुरुवार को फ्लैग मार्च निकाला गया। एडिशनल एसपी विजय डावर ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था में RAF, पैरामिलिट्री फोर्स, STF और घुड़सवार पुलिस सहित 8 विशेष सुरक्षा कंपनियां लगाई गई हैं।

721 सालों के संघर्ष का दिन

भोज उत्सव समिति का कहना है कि यह दिन हिंदू समाज के लिए ऐतिहासिक है। अशोक जैन ने कहा कि 721 सालों के संघर्ष के बाद हिंदू समाज स्वाभिमान के साथ मां सरस्वती का पूजन करेगा। समिति सदस्य गोपाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला को राजा भोज कालीन स्वरूप में वापस लाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

केंद्र सरकार को भेजी गईं तीन मांगें

भोज उत्सव समिति ने केंद्र सरकार को तीन सूत्रीय मांग पत्र भी भेजा है। अधिवक्ता मनीष गुप्ता के अनुसार पहली मांग लंदन से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा वापस लाने की है। दूसरी मांग गर्भगृह में लिखी इस्लामिक आयतों को हटाने की है। वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने एएसआई सर्वे में मिली 94 देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भोजशाला में स्थापित करने की मांग उठाई है।

मुस्लिम पक्ष SC पहुंचा

इधर हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। काजी मोइनुद्दीन ने गुरुवार रात विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करते हुए आदेश को एकतरफा बताया। सदर अब्दुल समद ने कहा कि कमाल मौला मस्जिद में पिछले 700 सालों से जुमे की नमाज अदा होती रही है और इस परंपरा को प्रभावित किए जाने से समाज में दुख है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी लड़ाई संवैधानिक और कानूनी दायरे में लड़ी जाएगी।

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