शिवराज सिंह चौहान और विवेक तन्खा, (सोर्स- X/@VTankha)
Shivraj Singh Chauhan And Vivek Tankha: कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लगाए सभी मानहानि के केस वापस ले लिए हैं। उसके बाद आज जब संसद में उनका आमना-सामना हुआ तो अंदाज कुछ अलग ही रहा। जहां शिवराज सिंह चौहान उनके साथ विनम्र नजर आए, वहीं विवेक तन्खा भी अपने दोस्ताना अंदाज में उनसे मिले। मिलने के बाद विवेक तन्खा ने ट्वीट कर कहा कि सभी मामले खत्म (सर्वोच्च न्यायालय में मेरे द्वारा वापस लेने के पश्चात) शिवराज सिंह चौहान जी के साथ संसद में पहली मुलाकात। मध्य प्रदेश मूलतः मित्रता का ना की शत्रुता के भाव का प्रदेश है। पब्लिक लाइफ में हम सब को बड़ा दिल रखना चाहिए।
दरअसल, सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कई मौकों पर शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मानहानि से जुड़े कानूनी मामले दर्ज कराए। इन मामलों का केंद्र बिंदु राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक आरोप रहे। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दोनों के बीच में रस्सकसी चलती रही।
विवेक तन्खा की ओर से देश के प्रमुख वकीलों में शुमार कपिल सिब्बल, केटीएस तुलसी जैसे लोगों ने भी पैरवी की। जिससे वह इन मामलों में लगातार तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भारी पड़ते रहे। आखिर में फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट में आपसी सहमति से यह विवाद समाप्त कर दिया गया और विवेक तन्खा ने मानहानि से जुड़े सभी मामले वापस ले लिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक वक्त में दोनों नेता अच्छे दोस्त माने जाते थे।
सब केसेस खत्म ( सर्वोच्च न्यायालय में मेरे द्वारा वापस लेने के पश्चात ) @ChouhanShivraj ji के साथ संसद प्रांगण में पहली मुलाकात। मध्य प्रदेश मूलतः मित्रता का ना की शत्रुता के भाव का प्रदेश है। पब्लिक लाइफ में हम सब को बड़ा दिल रखना चाहिए। pic.twitter.com/jZ3rHN97FL — Vivek Tankha (@VTankha) February 13, 2026
विवेक तन्खा कांग्रेस के लीगल टीम का बड़ा चेहरा हैं और देश के प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हैं। राज्यसभा के लिए दूसरी बार निर्वाचित होकर सदन में पहुंचे हैं। कश्मीरी ब्राह्मण हैं और मध्य प्रदेश से लेकर देश की राजनीति में कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं। ये हैं वो प्रमुख मामले जिनसे जुड़ा था शिवराज सिंह का नाम।
सांसद विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ साल 2021 में 10 करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर किया। इसमें आरोप था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य नेताओं ने सार्वजनिक मंचों और मीडिया में यह कहा कि विवेक तन्खा ओबीसी आरक्षण के विरोधी हैं, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।
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विवेक तन्खा ने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान ने पंचायत चुनावों पर रोक के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया। तन्खा का आरोप था कि राजनीतिक फायदे के लिए उनके खिलाफ भ्रामक बयान दिए गए, जिससे उनकी सार्वजनिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।