मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपी फाइनल रिपोर्ट
MP UCC News : MP में UCC लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। उच्च स्तरीय समिति ने सीएम मोहन यादव को फाइनल रिपोर्ट सौंपी, जिसमें ST समुदाय को छूट और लिव-इन रजिस्ट्रेशन जैसे सुझाव शामिल हैं।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
सीएम को सौंपी फाइनल रिपोर्ट (फोटो सोर्स- नवभारत)
MP UCC Final Report: मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी। समिति ने प्रदेश की सामाजिक संरचना, जनजातीय परंपराओं और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार की है।
रिपोर्ट में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है। समिति का मानना है कि आदिवासी समाज की अलग सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्थाओं को संरक्षित रखना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए जनजातीय समुदायों को विशेष छूट देने का सुझाव दिया गया है।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की सिफारिश
UCC के प्रस्तावित ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए। पंजीकरण के बाद इसकी जानकारी संबंधित पुलिस थाने और दोनों पक्षों के माता-पिता को भेजने का प्रावधान भी रखा गया है। रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि यदि कोई व्यक्ति लिव-इन रजिस्ट्रेशन के दौरान अपनी पहचान या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को लेकर गलत तथ्य प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
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तीन हिस्सों में तैयार की गई रिपोर्ट
- पहले भाग में देश-विदेश और अन्य राज्यों में लागू कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन तथा समिति की सिफारिशें शामिल हैं।
- दूसरे भाग में मुख्य विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है। इसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे विषयों को शामिल किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में 404 धाराएं, 4 भाग और 7 अनुसूचियां शामिल हैं।
- तीसरे भाग में जनता से मिले सुझावों का विश्लेषण किया गया है। समिति को कुल 9.58 लाख सुझाव प्राप्त हुए थे, जिनका लिंगवार, समुदायवार और विषयवार अध्ययन किया गया है।
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विधानसभा के मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिपोर्ट तैयार करने वाली समिति और सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई के प्रयासों की सराहना की है। फिलहाल रिपोर्ट को विधि विभाग के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है। माना जा रहा है कि विधि विभाग की समीक्षा और राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद UCC विधेयक को विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
