MP सामाजिक न्याय विभाग में 10.99 करोड़ का टेंडर फर्जीवाड़ा! चौगुने दाम में बेचा UPS, EOW ने 4 पर दर्ज की FIR

MP Tender Scam : मध्य प्रदेश सामाजिक न्याय विभाग में 10.99 करोड़ रुपए के कथित टेंडर फर्जीवाड़े में EOW ने रणधीर पटेल समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। GeM टेंडर प्रक्रिया की जांच जारी है।
EOW FIR in MP social justice department tender fraud case
EOW ने रणधीर पटेल समेत 4 पर दर्ज की FIRफोटो सोर्स- सोशल मीडिया
Published on
Updated on

MP Social Justice Department Scam : मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में करीब 10.99 करोड़ रुपए के टेंडर में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने प्रारंभिक जांच के बाद मुख्य आरोपी रणधीर कुमार पटेल समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है। जांच में GeM पोर्टल पर कथित तौर पर फर्जी प्रतिस्पर्धा दिखाकर टेंडर हासिल करने और सरकारी राशि का नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं।

जांच के दौरान EOW को टेंडर प्रक्रिया में शामिल कुछ फर्मों के बीच कथित समानता मिली। GST रिकॉर्ड के मुताबिक 'मेसर्स शांति ट्रेडर्स', 'मेसर्स HTM इंडिया' और मुख्य आरोपी से जुड़ी 'साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम' के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और कार्यालय का पता एक ही होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी को आशंका है कि अलग-अलग फर्मों के जरिए टेंडर में प्रतिस्पर्धा का स्वरूप तैयार किया गया।

3 हजार का UPS 11 हजार से ज्यादा में सप्लाई करने का आरोप

मामले में एक UPS की कीमत को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत और जांच के मुताबिक करीब 3,754 रुपए कीमत वाले UPS को विभाग को 11,247 रुपए में सप्लाई किया गया। वहीं, उसके डिब्बे पर MRP 6,086 रुपए दर्ज होने की बात कही गई है। EOW अब टेंडर में निर्धारित कीमत और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच अंतर सहित खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

टेंडर से पहले ही इंस्टॉलेशन का दावा

जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि विभाग ने संबंधित टेंडर 23 सितंबर 2024 को जारी किया था, जबकि कुछ उपकरणों का इंस्टॉलेशन इससे करीब दो महीने पहले 22 जुलाई 2024 को ही हो चुका था। आरोप है कि बाद में इन उपकरणों को नया बताकर कागजों में सप्लाई दिखाया गया। कंप्यूटरों में ब्रांडेड Acer के बजाय अलग कंपनियों की SSD और RAM लगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

कौन हैं रणधीर कुमार पटेल?

EOW की FIR में रणधीर कुमार पटेल को मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया है। उपलब्ध बायोडाटा के मुताबिक पटेल मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले हैं और वर्ष 1974 में जन्मे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में डिप्लोमा इंजीनियर पटेल के बारे में बायोडाटा में दावा है कि वह वर्ष 1990 से 'साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम' का संचालन कर रहे हैं। कंपनी के मध्य प्रदेश में 17 कार्यालय और करीब 65 कर्मचारी होने का भी उल्लेख है।

बायोडाटा में राजनीतिक-सामाजिक पदों का उल्लेख

रणधीर पटेल के बायोडाटा में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े रहने का भी उल्लेख किया गया है। इसमें उन्हें संघ का 'द्वितीय वर्ष प्रशिक्षित' स्वयंसेवक बताया गया है और वर्ष 2012 से 2021 के बीच भोपाल में विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालने का दावा किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में गोविंदपुरा सीट से दावेदारी और हिंदू जागरण मंच की निधि टोली से जुड़े होने का भी उल्लेख है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है।

EOW FIR in MP social justice department tender fraud case
पन्ना में बाढ़ जैसे हालात: किलकिला नदी का पानी बस्ती में घुसा, छत पर फंसे 12 लोगों का SDRF ने किया रेस्क्यू

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी उठाए सवाल

इधर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि 4 डमी फर्मों के जरिए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई, ₹3,754 कीमत वाले UPS के लिए ₹11,247 का भुगतान किया गया और टेंडर जारी होने से पहले ही कंप्यूटरों की सप्लाई के साथ घटिया लोकल पार्ट्स लगाए गए। मामले में चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है। दिव्यांगजनों के अधिकारों से जुड़े विभाग में कथित भ्रष्टाचार का यह खेल आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है।

EOW ने चार आरोपियों पर दर्ज की FIR

इस मामले की शिकायत शिवम यादव और विनय रायकवार द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में आरोपों में प्रथम दृष्टया तथ्य मिलने के बाद भोपाल EOW ने रणधीर कुमार पटेल, हेमलता, अशोक कुमार सिंह और देवेंद्र सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की है। साथ ही कथित फर्जीवाड़े के केंद्र में रही 'साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम' को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश किए जाने की बात भी सामने आई है। अब EOW टेंडर प्रक्रिया, कंपनियों के आपसी संबंध, उपकरणों की वास्तविक कीमत और सरकारी भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com