MP Promotion News: सालों बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया, 15 हजार पुलिसकर्मियों के मूल पद पर लौटने का खतरा
MP Promotion Rules 2025: पदोन्नति प्रक्रिया फिर शुरू हो गई है। जहां 1500 कर्मचारियों को नियम-16 नोटिस से राहत मिलेगी, वहीं 15000 पुलिसकर्मियों पर कार्यवाहक पद से मूल पद पर लौटने का खतरा मंडरा रहा है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
वल्लभ भवन (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
MP Government Employees Promotion: मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद सरकारी कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति प्रक्रिया एक बार फिर शुरू हो गई है। मप्र पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद कई विभागों में प्रमोशन की प्रक्रिया तेज हो गई है। जहां एक ओर हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों में खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग में कार्यवाहक पद पर तैनात कर्मचारियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 2016 से नियमित पदोन्नति प्रक्रिया लगभग बंद थी। इस दौरान कई विभागों में कर्मचारियों को कार्यवाहक प्रभार देकर उच्च पदों पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पुलिस विभाग में वर्ष 2021 से आरक्षक से लेकर निरीक्षक और डीएसपी स्तर तक के कई अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति दी गई थी। अब नियमित पदोन्नति से पहले विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) द्वारा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
1 हजार पुलिसकर्मी पाए जा सकते हैं अपात्र
इस प्रक्रिया में कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR), पिछले पांच वर्षों में मिले विभागीय दंड, निलंबन और न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच प्रक्रिया में करीब 1 हजार पुलिस अधिकारी-कर्मचारी अपात्र पाए जा सकते हैं। ऐसे कर्मचारियों का कार्यवाहक प्रभार समाप्त कर उन्हें उनके मूल पद पर वापस भेजा जा सकता है।
सम्बंधित ख़बरें
उज्जैन उत्कृष्ट विद्यालय में शिक्षक-छात्र विवाद पर बवाल, चक्काजाम के बाद इंटर्न शिक्षिका हटाई गई, जांच शुरू
दतिया उपचुनाव: मां पीतांबरा के दर पर पहुंचे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और प्रत्याशी आशुतोष तिवारी, जीत का दावा
सागर: बस में युवतियों से अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया
दतिया उपचुनाव:टिकट विवाद पर BJP में घमासान, NH-44 पर 11 घंटे जाम के बाद हिंसा, 27 नेताओं समेत 200 लोगों पर FIR
32 पुलिसकर्मियों को मूल पद पर भेजा
पुलिस विभाग में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। एक जिले में कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के पद पर तैनात 32 पुलिसकर्मियों का प्रभार समाप्त कर उन्हें मूल पद आरक्षक पर वापस भेजने के आदेश जारी किए गए हैं। इससे पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है।
1500 कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद
वहीं, प्रदेश के अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। अब मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-1966 के नियम-16 के तहत जारी सामान्य कारण बताओ नोटिस या छोटी अनुशासनात्मक कार्रवाई पदोन्नति में बाधा नहीं बनेगी। शासन स्तर पर ऐसे मामलों का जल्द निराकरण कर पात्र कर्मचारियों को प्रमोशन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इससे करीब 1500 कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इन विभागों में पदोन्नति
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया की पहल के बाद इस दिशा में तेजी आई। उन्होंने सुझाव दिया था कि वर्षों बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया को सामान्य नोटिस के कारण नहीं रोका जाना चाहिए। इसके बाद कई मामलों की समीक्षा कर कार्रवाई की गई। इधर, विधानसभा सचिवालय और उच्च शिक्षा विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विधानसभा सचिवालय ने 182 अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति सूची जारी की है, जबकि उच्च शिक्षा विभाग में डीपीसी के बाद 458 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दी गई है।
ये भी पढ़ें : सागर: बस में युवतियों से अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया
पुलिस विभाग में चिंता
कुल मिलाकर प्रदेश में वर्षों से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया ने कर्मचारियों को राहत दी है, लेकिन पुलिस विभाग में कार्यवाहक पद संभाल रहे हजारों कर्मचारियों के लिए यह प्रक्रिया चिंता का कारण बन गई है।
