

Election Commission Election Apps Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को पूरी तरह से पारदर्शी, तेज और कागज-रहित बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने तकनीक की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। अब चुनाव की निगरानी केवल मतदान के दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची के प्रकाशन से लेकर चुनाव परिणाम तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है।
29 सितंबर 2026 को प्रदेश में हुए नगरीय निकाय और पंचायत उपचुनावों में इन नई तकनीकों का सफलतापूर्वक जमीनी इस्तेमाल किया गया।
आयोग ने इंटीग्रेटेड इलेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (IEMS) का एडवांस वर्जन तैयार किया है। पहले जिला स्तर से डेटा आने के बाद राज्य स्तर पर मैन्युअल रूप से अगली प्रक्रिया शुरू होती थी। लेकिन नए मॉडल में एक चरण (जैसे मतदाता सूची का प्रकाशन) पूरा होने के बाद, उससे जुड़ा अगला चरण सिस्टम में अपने आप ट्रिगर हो जाता है। इससे बार-बार डेटा भेजने और मैन्युअल मॉनिटरिंग की जरूरत काफी कम हो गई है।
मतदान केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं की जांच के लिए पहली बार 'पोलिंग स्टेशन सर्वे ऐप' का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए मतदान केंद्र पर रैंप, दिव्यांगों के लिए सुविधा, शौचालय, पेयजल और भवन की स्थिति की डिजिटल जांच की जाती है। यदि कोई कमी पाई जाती है, तो ऐप के जरिए ही सुधार की निगरानी की जाती है। अब बूथ की सुविधाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका एक रियल-टाइम डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है।
चुनाव पर्यवेक्षकों (Observers) को कागजी रिपोर्ट तैयार करने और भेजने की झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए 'प्रेक्षा' ऐप लॉन्च किया गया है। 2 सितंबर 2026 को अपडेट हुए इस ऐप के जरिए इलेक्शन और रोल ऑब्जर्वर अपनी रिपोर्ट सीधे मैदानी स्तर से IEMS बैकएंड (केंद्रीय चुनाव प्रबंधन सिस्टम) पर जमा कर सकते हैं। इसमें प्रशिक्षण सामग्री और उपस्थिति दर्ज करने जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
तकनीकी नवाचारों के साथ-साथ मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने एक अनोखी 'EVM Sharing Policy' बनाई है। इसके तहत एमपी अपनी अतिरिक्त ईवीएम अन्य राज्यों को स्थानीय चुनाव के लिए किराए पर दे रहा है। अब तक छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान और सिक्किम जैसे राज्यों को मशीनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
चूंकि मशीनें अब राज्य की सीमाओं के बाहर भी जा रही हैं, इसलिए उनके डेटाबेस, पहचान और उपलब्धता को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती थी। इस समस्या को सुलझाने के लिए आयोग ने अपना खुद का 'EVM Randomization Software' तैयार किया है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि कौन सी मशीन किस राज्य या मतदान केंद्र पर है, इसकी पूरी प्रक्रिया सिस्टम आधारित और आसानी से ट्रेस करने योग्य रहे।