

Narottam Mishra Not Invited In BJP Core Meeting: मध्य प्रदेश भाजपा के अंदरूनी समीकरण और सत्ता का केंद्र तेजी से बदल रहा है। दतिया चुनाव में मिली करारी शिकस्त और आगामी दतिया उपचुनाव की सुगबुगाहट के बीच, प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पार्टी के शीर्ष पटल से हाशिए पर जाते दिख रहे हैं।
हाल ही में पार्टी के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब, सह प्रभारी रेखा वर्मा और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी के नेतृत्व में कोर ग्रुप की पहली बैठक आयोजित हुई, जिसमें नरोत्तम मिश्रा को आमंत्रित ही नहीं किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एक स्पष्ट संकेत है कि उनका कद घटाने की कोशिश लगातार की जा रही है सूत्रों की माने तो उन्हें कोर कमेटी से आधिकारिक तौर पर बाहर भी किया जा सकता है।
हैरानी की बात यह है कि वर्तमान भाजपा कोर ग्रुप की अधिकृत सूची में 11वें नंबर पर नरोत्तम मिश्रा का नाम दर्ज है। इसके बावजूद पार्टी संगठन की ओर से उन्हें इस अहम रणनीतिक बैठक की कोई सूचना नहीं दी गई। जब मीडिया ने इस संबंध में सीधे नरोत्तम मिश्रा से बात की, तो उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की कि उन्हें बैठक का कोई बुलावा या जानकारी नहीं मिली थी।
दतिया विधानसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित हार के बाद से ही बदलते सियासी घटनाक्रमों में नरोत्तम मिश्रा की भूमिका सीमित होती गई है। अब जब दतिया में भविष्य के चुनावी समीकरणों (उपचुनाव) को लेकर रणनीतियां बन रही हैं, ऐसे समय में उन्हें कोर ग्रुप से दूर रखना यह बताता है कि पार्टी आलाकमान अब उस क्षेत्र में नए चेहरों और नई रणनीति पर भरोसा जताने के मूड में है।
बैठक में नरोत्तम मिश्रा की अनुपस्थिति पर जब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से सवाल किया गया, तो उन्होंने सधा हुआ जवाब देते हुए कहा, 'कोर ग्रुप में जितने सदस्य हैं, उनमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को छोड़कर सभी इस बैठक में शामिल हुए हैं।' गौरतलब है कि बैठक के अंतिम दौर में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मंथन में हिस्सा लेने पहुंचे।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा नाम हैं, जिनकी अहमियत को सत्ता में रहते हुए भी और सत्ता से बाहर होने के बाद भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया से उनकी हार और हालिया 2026 के उपचुनावों में टिकट कटने के घटनाक्रम ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है कि "नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के लिए जरूरी हैं या महज एक सियासी मजबूरी?"