ग्वालियर HC का सख्त रुख: 4 अफसरों के खिलाफ जमानती वारंट जारी, 7 साल से लंबित फैमिली पेंशन मामले में कार्रवाई
Bail Warrant Against 4 Officers: हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के 4 अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। HC ने पेंशन से जुड़े मामले में लापरवाही पर ये कार्रवाई की है।
- Written By: प्रीतेश जैन
ग्वालियर खंडपीठ (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
MP High Court News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ 10-10 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए हैं। यह कार्रवाई एक विधवा महिला को 7 सालों से फैमिली पेंशन न मिलने के मामले में की गई है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पेंशन जैसे संवेदनशील मामलों में लापरवाही और टालमटोल किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
किन अधिकारियों पर कार्रवाई?
कोर्ट ने प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल, स्वास्थ्य आयुक्त, ग्वालियर सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव और जिला पेंशन अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब करते हुए जमानती वारंट जारी किए हैं।
सम्बंधित ख़बरें
इंदौर से चलने वाली बसों में तोड़फोड़, बस संचालकों ने पुलिस कमिश्नर से की शिकायत
नागपुर कोर्ट अपडेट: मुआवजे के आदेश की अनदेखी पर फंसे NHAI अफसर, HC ने पूछा- क्यों न चलाएं अवमानना का केस?
कलेक्टर के निर्देश पर आबकारी विभाग का बड़ा एक्शन, अवैध शराब के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई
बीएसएफ जवान को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, डबल बेंच ने पुनर्नियुक्ति के दिए निर्देश
7 साल से भटक रही है याचिकाकर्ता
मामला याचिकाकर्ता शीला त्रिपाठी से जुड़ा है। उनके पति साल 2014 में मेडिकल ऑफिसर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके निधन के बाद 2017 से ही शीला त्रिपाठी फैमिली पेंशन और अन्य देय लाभों के लिए विभाग के चक्कर लगा रही हैं। समाधान न मिलने पर उन्होंने 2019 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन 7 साल बाद भी मामला लंबित है।
ये भी पढ़ें : गर्मी से बेहाल मध्य प्रदेश: 11 जिलों में 4 दिन तक हीट वेव का अलर्ट, रतलाम में पारा 46 डिग्री के पार
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान ग्वालियर हाई कोर्ट ने कहा कि 2019 में नोटिस जारी होने के बावजूद विभाग ने अब तक कोई जवाब पेश नहीं किया है। कोर्ट ने इसे विभाग की लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली बताया। पिछली सुनवाई (5 मार्च 2026) में भी अदालत ने अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद न तो जवाब दिया गया और न ही अधिकारी पेश हुए।
