MP Power Purchase Agreement Rules: बिजली खरीद समझौतों में पारदर्शिता,अब कैबिनेट की मंजूरी होगी अनिवार्य
MP Power Management Company Limited News:मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला; बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के बजाय अब मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट लेगी निर्णय
- Written By: सुधीर दंडोतिया
बिजली खरीद समझौतों में पारदर्शिता,सोर्स :सोशल मीडिया
MP Power Agreements: मध्यप्रदेश शासन ने राज्य की ऊर्जा नीति और वित्तीय जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के नए निर्णय के अनुसार, अब भविष्य में होने वाले सभी दीर्घकालीन और मध्यकालीन बिजली खरीद समझौतों (PPA) और बिजली आपूर्ति समझौतों (PSA) के लिए कैबिनेट की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
अब तक इन समझौतों को मंजूरी देने का अधिकार कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पास था। हालांकि, समझौतों की दीर्घकालिक वित्तीय प्रकृति और राज्य की अर्थव्यवस्था पर उनके प्रभाव को देखते हुए, अब इन्हें मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। शासन का मानना है कि इस बदलाव से ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय जोखिमों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
नई तकनीकों के लिए विशेषज्ञ परामर्श
नीति में इस बदलाव का एक मुख्य कारण ऊर्जा क्षेत्र में आ रही आधुनिक तकनीकें भी हैं। वर्तमान में बायोमास, सोलर बैटरी स्टोरेज, पंप हाइड्रो स्टोरेज और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों से बिजली अनुबंधों के प्रस्ताव मिल रहे हैं। इन तकनीकी प्रस्तावों पर राज्य शासन और वित्त विभाग के साथ गहन परामर्श की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसे अब कैबिनेट स्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा।
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ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश
- मध्यप्रदेश वर्तमान में एक ‘एनर्जी सरप्लस’ राज्य है।
- प्रदेश में वर्तमान मेंलगभग 1,795 छोटे-बड़े बिजली खरीद समझौते प्रभावी हैं।
- कुल 26,012 मेगावाट क्षमता के साथ निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है।
- सौर, पवन और थर्मल जैसे विभिन्न स्रोतों से राज्य की मांग पूरी हो रही है।
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अगला कदम
बोर्ड द्वारा तैयार किया गया यह प्रस्ताव जल्द ही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से इसे मुख्यमंत्री की अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट भेजा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी और सभी नए समझौते राज्य के व्यापक हित में होंगे।
