

Mandla Ambulance Case: मंडला जिले में एक गर्भवती महिला को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने और उसके चार नवजात बच्चों की मौत के मामले ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अव्यवस्था का परिणाम बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि मंडला में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने के बाद समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूरी में परिजनों को महिला को ऑटो से अस्पताल ले जाना पड़ा। रास्ते में ही महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया, लेकिन समय पर उचित इलाज और चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिलने के कारण चारों नवजातों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता का उदाहरण है।
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल किया कि आखिर इन चार मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि सरकार एयर एम्बुलेंस, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जब ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों को समय पर साधारण एम्बुलेंस तक नहीं मिलती, तो उन दावों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापनों, आयोजनों और प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार बदहाल होती जा रही हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यदि समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध हो जाती और महिला को उचित चिकित्सा सुविधा मिलती तो शायद चारों नवजातों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में एम्बुलेंस सेवा और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।
फिलहाल इस घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस इसे भाजपा सरकार की संवेदनहीनता और स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी बता रही है, जबकि मामले को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। चार नवजातों की मौत ने एक बार फिर प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।