मध्यप्रदेश का Textile सेक्टर में बड़ा लक्ष्य, 2030 तक 5 अरब डॉलर के निर्यात का टारगेट, 11 जिलों पर फोकस
MP Textile Export Target: उद्योग, कौशल और ग्लोबल बाजार को रोडमैप जोड़कर बनाया है। राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति को आगे बढ़ाते हुए टेक्सटाइल सेक्टर में राज्य को अग्रणी बनाने के लिए में कार्य किया जा रहा है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
मध्यप्रदेश का टेक्सटाइल सेक्टर में बड़ा लक्ष्य, सोर्स :सोशल मीडिया
Bhopal News: मध्यप्रदेश ने Textile सेक्टर में साल 2030 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित करते हुए इसके लिए एक स्पष्ट और समग्र कार्ययोजना तैयार की है। 2030 तक भारत के 100 अरब डॉलर टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य में मध्यप्रदेश की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तैयार की है।
राज्य में टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 11 जिलों को चिन्हित किया गया है। इनमें सीहोर, रायसेन, धार, इंदौर, खरगोन, उज्जैन और भोपाल को चैंपियन जिले तथा जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और बुरहानपुर को आकांक्षी जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन जिलों में उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात गतिविधियों को एकीकृत रूप से विकसित करने की रणनीति बनाई गई है।
पीएम मित्र पार्क से निवेश और रोजगार को बल
धार के पीएम मित्र पार्क के माध्यम से टेक्सटाइल सेक्टर को नई गति मिल रही है। यहां 38 कंपनियों द्वारा 21,500 करोड़ रुपए के निवेश की प्रतिबद्धता सामने आई है, जिससे लगभग 55 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। यह विकास राज्य को टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
कांग्रेस के चक्काजाम पर बरसे विश्वास सारंग, कहा- कांग्रेस का काम ही भ्रम की राजनीति करना है
‘सुशासन का है यह दौर, जिसका ओर है ना छोर’, निगम-मंडलों के अध्यक्षों से मुलाकात कर बोले सीएम मोहन यादव
कैलाश विजयवर्गीय पर बंगाल के केसों को लेकर गरमाई सियासत, आमने-सामने बीजेपी और कांग्रेस
Poison Anti Aging Skin Clinic के डॉ. अभिनीत पर रेप का आरोप, युवती की शिकायत पर FIR दर्ज
कौशल विकास और नए निर्यातकों पर विशेष जोर
सरकार ने तय किया है राज्य में एक लाख से अधिक युवाओं को टेक्सटाइल सेक्टर के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए समर्थ 2.0, निफ्ट भोपाल के विस्तार और चैंपियन जिलों में नए प्रशिक्षण संस्थानों का उपयोग किया जाएगा। राज्य से एक हजार नए निर्यातकों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। जिला स्तरीय निर्यात समितियों, एक्ज़िम बैंक, ईसीजीसी और अन्य संस्थाओं के सहयोग से छोटे और मध्यम उद्यमों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा।
लॉजिस्टिक्स और अधोसंरचना होगी मजबूत
निर्यात को आसान और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पीथमपुर में नया इनलैंड कंटेनर डिपो विकसित किया जा रहा है और मण्डीदीप में मौजूदा सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही पीएम मित्र पार्क से इंदौर तक कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा रहा है। राज्य में कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां परीक्षण, डिजाइन और मूल्य संवर्धन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे MSME इकाइयों को गुणवत्ता सुधार में सहायता मिलेगी।
नई तकनीक और डिज़ाइन से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए टेक्सटाइल इकाइयों में ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और डिजिटल गुणवत्ता प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा। डिजाइन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए निफ्ट भोपाल में तकनीकी वस्त्र, टिकाऊ फैशन और ब्रांडिंग आधारित नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे उत्पादों का मूल्य संवर्धन हो सके।
यह भी पढ़ें : कैलाश विजयवर्गीय पर बंगाल के केसों को लेकर गरमाई सियासत, आमने-सामने बीजेपी और कांग्रेस
ग्लोबल बाजार और एफटीए का लाभ उठाने की रणनीति
मध्य प्रदेश ने अमेरिका, यूरोप, यूनाइटेड किंगडम, यूएई और जापान जैसे प्रमुख बाजारों को ध्यान में रखते हुए निर्यात रणनीति तैयार की है। यूके, यूएई, ईएफटीए और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने के लिए जिला स्तर पर उत्पाद मैपिंग और उद्योग समन्वय किया जाएगा।
पारंपरिक वस्त्रों को मिलेगा वैश्विक मंच
“टेक्सटाइल्स ऑफ एमपी” अभियान में चंदेरी, माहेश्वरी, बाग प्रिंट और बाटिक प्रिंट जैसे पारंपरिक उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग की जाएगी। इससे कारीगरों को नए बाजार मिलेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी।
