EXCLUSIVE: 'गड्ढों के बीच कहीं सड़क छूट गई', राजधानी भोपाल की सड़कों के हाल 'बेहाल'; आंखें मूंदकर बैठा प्रशासन

Pitholes In Bhopal Road: राजधानी भोपाल में आयकर भवन के सामने सड़कों पर जानलेवा गड्ढे, कांग्रेस ने भी प्रशासन को घेरा- देखें नवभारत लाइव की यह स्पेशल रिपोर्ट।
Exclusive report highlights pothole-ridden roads causing hardship for commuters in Bhopal
आयकर भवन के सामने वाली सड़क का हाल बेहाल (सोर्स- नवभारत लाइव)
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Navbharat Live Ground Report: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अधिकतम सड़कों की हालत पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सवाल खड़े होते हैं नेताओं के उन दावों पर जिसमें एमपी की सड़कों को यूनाइटेड स्टेट्स से बेहतर बताया जाता है। नवभारत की टीम जब सड़कों का रियलिटी चेक करने निकली तो स्थिति काफी गंभीर दिखाई दी, राजधानी भोपाल में आयकर भवन के ठीक सामने की सड़क की हालत काफी खराब नजर आई।

बता दें कि, यहां सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि वाहन चालकों का सुरक्षित निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के बाद हालात और बदतर हो गए हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर घायल हो रहे हैं।

कई सालों से झेल रहे यही परेशानी- स्थानीय नागरिक

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस सड़क की समस्या नई नहीं है। कई वर्षों से लोग इसकी मरम्मत की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं दे रहा।

देखें नवभारत की रिपोर्ट

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी सरकार और प्रशासन पर साधा निशाना

कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता अभिनव बरौलिया ने सड़क की तस्वीरें और वीडियो साझा कर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उनका कहना है कि राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में शामिल इस सड़क की बदहाल स्थिति सरकार के विकास के दावों की पोल खोल रही है।

गड्ढों के बीच कहीं सड़क छूट गई- स्थानीय लोगों का तंज

कभी कहा गया था कि मध्य प्रदेश की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं और अब हालात ऐसे हैं कि भोपाल में आयकर भवन के सामने सड़क देखकर लोग मजाक में कह रहे हैं कि लगता है गड्ढों के बीच कहीं सड़क छूट गई है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजधानी के वीआईपी इलाके की सड़क जब इस हाल में है तो बाकी शहर की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन गड्ढों को भरता है या हादसों की खबरें ही भरती रहेंगी।

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