MP Education Policy: डिग्री के साथ रोजगार पर फोकस, शिक्षा को ‘स्टूडेंट फ्रेंडली’ और हाई-टेक बना रही सरकार
CM Mohan Yadav Education Initiative: कॉलेजों में AI और डेटा साइंस की पढ़ाई, 'कालेज चलो अभियान' से कोई नहीं रहेगा उच्च शिक्षा से वंचित; बेटियों को मिलेगी सालाना ₹5,000 की मदद।
- Written By: सुधीर दंडोतिया
युवाओ को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव का प्लान। सोर्स: सोशल मीडिया
Madhya Pradesh Higher Education: मध्य प्रदेश सरकार अब राज्य के युवाओं को सिर्फ डिग्री बांटने तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि शिक्षा को सीधे कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और रोजगार से जोड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें नए जमाने के उद्योगों के लिए तैयार करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसी उद्देश्य के साथ प्रदेश में नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत कई बड़े बदलाव किए गए हैं। अब मध्य प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में केवल पारंपरिक विषय ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, फिनटेक और बायो-टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक और तकनीकी विषयों की पढ़ाई शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, पायलट ट्रेनिंग और कृषि जैसे व्यावहारिक कोर्स भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए गए हैं।
कोई भी प्रतिभाशाली छात्र शिक्षा से नहीं रहेगा वंचित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में 31 मई से ‘कालेज चलो अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि 12वीं कक्षा पास करने के बाद कोई भी होनहार विद्यार्थी पैसों या अवसरों की कमी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति, शुल्क सहायता, हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।
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बेटियों के लिए विशेष वित्तीय सहायता
छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही ‘गांव की बेटी’ और ‘प्रतिभा किरण’ योजनाओं के शानदार परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत पात्र छात्राओं को ₹500 प्रति माह की दर से 10 महीने तक, यानी कुल ₹5,000 प्रति शैक्षणिक सत्र की आर्थिक मदद सीधे दी जा रही है।
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‘सीखो-कमाओ योजना’ और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम
युवाओं को सीधे उद्योगों का अनुभव दिलाने के लिए प्रदेश में ‘सीखो-कमाओ योजना’ चलाई जा रही है, जहां युवा इंडस्ट्री से जुड़कर काम सीख भी रहे हैं और स्टाइपेंड भी कमा रहे हैं। इसके साथ ही, संत शिरोमणी रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में युवाओं को वर्ल्ड क्लास एडवांस ट्रेनिंग दी जा रही है। नई शिक्षा नीति के ‘मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम’ ने पढ़ाई को और भी लचीला बना दिया है, जिससे छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने और अपनी सुविधानुसार पढ़ाई जारी रखने की पूरी आजादी मिली है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यह प्रयास केवल कॉलेजों में एडमिशन बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के युवाओं में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास कर एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित मध्य प्रदेश’ के निर्माण का संकल्प है।
