नौरादेही से पहले गुजरात जाएंगे 4 चीते, कूनो नेशनल पार्क की जगह अब बन्नी ग्रासलैंड बनेगा नया ठिकाना
Cheetah Relocation To Gujarat: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से चीतों के रिलोकेशन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। नौरादेही की जगह गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में 4 चीतों की शिफ्टिंग की अनुमति मिली।
- Written By: प्रीतेश जैन
चीता (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Kuno Cheetah Project: मध्य प्रदेश में पुनर्वासित अफ्रीकी चीते अब गुजरात के जंगलों की नई पहचान बनने जा रहे हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी ने कूनो नेशनल पार्क से दो नर और दो मादा चीतों को गुजरात के कच्छ स्थित बन्नी ग्रासलैंड में शिफ्ट करने की मंजूरी दे दी है। अफ्रीका से भारत लाए जाने के बाद यह पहला मौका होगा, जब चीतों की अंतरराज्यीय शिफ्टिंग की जाएगी।
पहले योजना थी कि कूनो और गांधीसागर के बाद चीतों को मध्यप्रदेश के नौरादेही यानी वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बसाया जाएगा, लेकिन अब नौरादेही से पहले इन्हें गुजरात भेजने की तैयारी की जा रही है। कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए चीतों को भारतीय वातावरण के अनुसार तैयार किया गया था। अब इन्हीं चीतों को दूसरे राज्य में पुनर्वासित कर चीता प्रोजेक्ट का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
एमपी में हैं कुल 53 चीते
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अगस्त-सितंबर तक शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल मध्यप्रदेश में कुल 53 चीते मौजूद हैं। इनमें 50 चीते कूनो नेशनल पार्क में जबकि 3 गांधीसागर क्षेत्र में हैं। नौरादेही को चीतों के तीसरे घर के रूप में विकसित करने की तैयारी भी लगभग पूरी हो चुकी थी।
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अफ्रीकी सवाना जैसा है बन्नी ग्रासलैंड
कच्छ का बन्नी ग्रासलैंड खुले मैदान और विशाल प्राकृतिक विस्तार के कारण चीतों के लिए बेहद अनुकूल माना जा रहा है। इसकी भौगोलिक परिस्थितियां अफ्रीका के सवाना ग्रासलैंड जैसी हैं, जहां चीते आसानी से तेज गति से शिकार कर सकते हैं। खास बात यह है कि गुजरात में 1940 के दशक तक चीते पाए जाते थे और अब चीता प्रोजेक्ट के तहत करीब 80 साल बाद राज्य में उनकी वापसी होने जा रही है।
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600 हेक्टेयर में तैयार हो रहा स्पेशल चीता जोन
गुजरात के बन्नी क्षेत्र में चीतों के लिए करीब 600 हेक्टेयर में स्पेशल फेंसिंग की जा रही है। यहां सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर, क्वारंटीन जोन, मेडिकल सपोर्ट सिस्टम और ट्रैकिंग नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। एनटीसीए की टीम कई बार साइट विजिट कर शिकार की उपलब्धता, ग्रासलैंड की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन कर चुकी है।
