

Karnataka Politics: कर्नाटक में सियासी उथल-पुथल पर विराम लगता नजर आ रहा है। खबर है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई यानी गुरुवार को पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इससे पहले आज दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की बैठक हुई थी। अब कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। वह इससे पहले बुधवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित करेंगे।
राजनीतिक के जानकारों को कहना है कि कर्नाटक में भी बिहार जैसा सियासी फार्मूला बनाया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को नीतीश कुमार की ही तरह राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं, बिहार के उप मुख्यमंत्री रहे सम्राट चौधरी की तरह कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
सूत्रों ने यह भी बताया कि जैसे बिहार में नीतीश खुमार के बेटे को मंत्री बनाया गया, उसी तरह से सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र के लिए कैबिनेट में एक पद सुरक्षित किया जा सकता है या डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो यह बिल्कुल वैसी ही होगी जैसी कुछ हफ्ते पहले बिहार में हुई थी। गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ा और राज्यसभा चले गए, उनकी जगह उनके डिप्टी सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री का पद संभाला। इसके अलावा, नीतीश के बेटे निशांत कुमार ने पटना में बिहार के नए स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला।
इंडिया टूडे के रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सीएम पद से इस्तीफा देने की तैयारी में हैं। हालांकि, अब तक राज्यसभा को लेकर सिद्धारमैया की सहमति नहीं मानी जा रही है। इस समय सिद्धारमैया अपने करीबी मंत्रियों के साथ अहम बैठक कर रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया से मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा गया था। कांग्रेस हाईकमान ने उनको सीएम पद के बदले राज्यसभा भेजने की बात कही और दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी देने का आश्वासन भी दिया गया। वहीं अब डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की बात निकलकर सामने आ रही है।
कांग्रेस पार्टी के भीतर चर्चा है कि कर्नाटक में सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए यह ट्रांजिशन प्लान बनाया गया है। इस प्लान के तहत सरकार में बदलाव भी होगा। साथ ही संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने की कोशिश भी शामिल है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में प्रियंका गांधी भी एक्टिव रूप से शामिल हैं और वह नेतृत्व परिवर्तन के लिए दबाव बना रही हैं। प्रियंका की भागीदारी से यह संकेत और मजबूत हुआ है कि ये फैसला शीर्ष स्तर पर लिया जा रहा है।