

Highlights:
भोपाल RTO कार्यालय के बाहर नवभारत के स्टिंग ऑपरेशन में दलालों की वसूली का खुलासा।
वाहन फिटनेस के नाम पर 4 हजार से 10 हजार रुपए तक मांगने का आरोप।
दलालों ने रकम का बड़ा हिस्सा विभागीय कर्मचारियों तक पहुंचने की बात कही।
RTO अधिकारी जितेंद्र शर्मा ने कैमरे के सामने बयान देने से इनकार किया।
Bhopal RTO Sting Operation : राजधानी भोपाल में आरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों का जाल किस कदर फैला हुआ है, इसका खुलासा नवभारत के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ है। वाहन फिटनेस की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होने के बावजूद यहां दलालों के बिना काम कराना मुश्किल बताया जा रहा है। नवभारत की टीम ने जब आरटीओ कार्यालय के बाहर सक्रिय कुछ दलालों से ग्राहक बनकर बातचीत की तो वे हिडन कैमरे पर ऐसी बातें कहते नजर आए, जो परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
नवभारत की टीम के सामने कोई दलाल वाहन फिटनेस के नाम पर 4 हजार रुपये मांगता नजर आया, तो किसी ने 5 हजार और किसी ने सीधे 10 हजार रुपये तक की डिमांड कर दी। हैरानी की बात यह है कि एक दलाल ने तो यहां तक कह दिया कि पैसे दे दीजिए, बिना इंजन की गाड़ी भी पास कराकर दे देंगे।
आरटीओ कार्यालय के ठीक सामने सक्रिय दलाल यहां आने वाले वाहन मालिकों से संपर्क करते हैं और फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस समेत दूसरे काम कराने का दावा करते हैं। नवभारत की टीम ने जब इन दलालों से ग्राहक बनकर बातचीत की, तो फिटनेस कराने के नाम पर अलग-अलग रकम मांगी गई। किसी ने 4 हजार रुपये की मांग की, तो किसी ने 5 हजार और किसी ने 10 हजार रुपये तक मांगे। यानी वाहन मालिकों को फिटनेस के नाम पर निर्धारित शुल्क से कई गुना ज्यादा रकम चुकाने के लिए कहा जा रहा है।
नवभारत के स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक दलाल ने चौंकाने वाला दावा किया। उसका कहना था कि यहां जो रुपए लिए जाते हैं, उनका बड़ा हिस्सा विभागीय कर्मचारियों को जाता है, जबकि कुछ पैसा दलालों के पास बचता है। यदि यह दावा सही है, तो यह परिवहन विभाग की निगरानी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक दलाल ने खुलेआम दावा किया कि गाड़ी में इंजन तक नहीं होगा, तब भी वह उसे फिटनेस में पास करा सकता है। दलाल के शब्दों में, "आप बस पैसे दो, बाकी विभाग से गाड़ी पास कराने की गारंटी हमारी। बिना इंजन की गाड़ी भी होगी तो पास कराकर देंगे।" यह दावा वाहन फिटनेस जांच की पारदर्शिता और सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर है। अगर बिना जरूरी तकनीकी जांच के किसी वाहन को फिटनेस प्रमाणपत्र दिलाने का दावा किया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
वाहन फिटनेस की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद दलालों का कहना है कि उनके बिना काम कराना आसान नहीं है। एक दलाल ने तो यहां तक कहा कि विभाग के पास इतने नियम हैं कि बिना दलाल के आने वाले व्यक्ति की गाड़ी को किसी न किसी आधार पर अनफिट कर दिया जाएगा। यानी लोगों के मन में यह डर बैठाया जा रहा है कि अगर उन्होंने दलाल की मदद नहीं ली, तो उनका काम अटक सकता है। यही डर वाहन मालिकों से मनमानी रकम वसूलने का जरिया बन रहा है।
वहीं, वाहन फिटनेस के लिए लगने वाला शुल्क वाहन की श्रेणी और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर उपभोक्ता ऑनलाइन माध्यम से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं और निर्धारित शुल्क का भुगतान कर सकते हैं। ऐसे में फिटनेस के नाम पर 5 से 10 हजार रुपये तक की मांग किए जाने की शिकायतों की जांच जरूरी है।
इस पूरे मामले को लेकर नवभारत ने आरटीओ अधिकारी जितेंद्र शर्मा से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।ऐसे में सवाल उठता है कि आरटीओ कार्यालय के ठीक बाहर अगर दलाल खुलेआम वाहन मालिकों से हजारों रुपये मांग रहे हैं, विभागीय कर्मचारियों तक पैसे पहुंचने के दावे कर रहे हैं और बिना इंजन की गाड़ी पास कराने की बात कह रहे हैं, तो इन गतिविधियों पर निगरानी कौन कर रहा है?
आरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों की सक्रियता कोई नई बात नहीं है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार नवभारत के स्टिंग ऑपरेशन में दलालों के दावों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब सवाल यह है कि क्या परिवहन विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा? क्या स्टिंग में सामने आए दलालों की पहचान कर उनसे पूछताछ की जाएगी? क्या विभागीय कर्मचारियों तक कथित तौर पर पैसे पहुंचने के दावों की जांच होगी? और सबसे बड़ा सवाल- क्या आम लोगों को दलालों के चक्कर से मुक्ति मिल पाएगी?