असम की खास परंपरा (सौ.सोशल मीडिया)
Diwali 2024: दिवाली, हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार जिसे देशवासी बड़े ही उत्साह के साथ मनाते है। इस दिन घर और आंगन में दीप जलाकर और रंगोली बनाई जाती है। दिवाली के इस बड़े त्योहार के नाम कई सारी प्रचलित मान्यताएं है जिसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी होती है चलिए दिवाली की इस परंपरा में असम की ओर चलते हैं जहां पर दीवाली के दिन महिलाएं फसलों को दीया दिखाती है। इस परंपरा का संबंध किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़ा होता है जो बेहद खास बनाता है।
दिवाली के मौके पर असम में काति बिहू का त्योहार मनाते है जो आसपास के क्षेत्रों में बेहद खास होता है। असम और आसपास के क्षेत्रों में मनाए जाने वाले काति बिहू को कंगाली बिहू के नाम से भी जाना जाता है इस दिन धन और अन्न की देवी लक्ष्मी जी की आराधना की जाती है। काति बिहू की परंपरा में किसान अपने खेतों में जाकर नए फसल के आने की खुशी में यह त्योहार मनाती है। इस मौके पर किसान महिलाएं फसलों को दीया दिखाकर यह त्योहार मनाती है।
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इस काति बिहू के दिन कहा जाता है कि, सूर्यास्त के साथ ही एक खास प्रकार का अनुष्ठान किया जाता है जिसमें किसान दंपत्ति अपने खेतों में जाकर नई फसलों की पूजा करते है। इस दिन से महिलाएं पूरे कार्तिक मास तुलसी के पौधों की पूजा करती है। इस दौरान दीप जलाए जाते है।
यहां पर काति बिहू को कंगाली बिहू भी कहा जाता है इसका भी अलग अर्थ है। इस त्योहार का नाम कंगाली बिहू रखने के पीछे का मतलब यह है कि, इस समय किसानों के घरों में पिछली फसल का अनाज खत्म होने को होता है और नई फसल अभी पकने की प्रक्रिया में होती है। इसलिए किसान आर्थिक रूप से थोड़ा संकट में होते है इस नई फसल की सुनहरी बालियों को लेकर आने वाले समय के लिए उम्मीद की किरण के साथ त्योहार को मनाती है।