क्यों हर साल 11 फरवरी को मनाते हैं विश्व बीमार दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व
World Day Of The Sick Reasons: विश्व बीमार दिवस हर साल 11 फरवरी को मनाया जाता है। जानिए क्यों यह दिन बीमारों के लिए महत्वपूर्ण है और इसका इतिहास और उद्देश्य क्या है।
- Written By: सीमा कुमारी
विश्व बीमार दिवस(सौ.सोशल मीडिया)
World Day Of The Sick: आज 11 फरवरी को समूचे विश्व में विश्व बीमार दिवस मनाया जा रहा है। इस दिवस को मनाने का मूल उद्देश्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों, उनके परिवारों और देखभाल करने वालों के प्रति करुणा व सहानुभूति व्यक्त करना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्व बीमार दिवस दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है जिसका उद्देश्य है हमें बीमार लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद दिलाता है और साथ-साथ उनके परिवारों और दोस्तों के प्रति भी अधिक सहानुभूति और समझ विकसित करने में भी मदद करता है।
यह दिन कैथोलिक चर्च के लिए पीड़ित लोगों के लिए प्रार्थना करने का एक तरीका प्रदान करता है। ऐसे में आज विश्व बीमार दिवस के अवसर पर चलिए जानते हैं इससे जुड़ी तमाम बातें
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कैसे हुई विश्व बीमार दिवस की शुरुआत
विश्व बीमार दिवस की शुरुआत कैथोलिक चर्च के पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 1992 में की थी। इसका उद्देश्य बीमारों और पीड़ितों के लिए जागरूकता बढ़ाना और उन्हें आशा देना था।
शुरुआत के पीछे यह कारण था कि पोप जॉन पॉल द्वितीय खुद पार्किंसंस रोग (PD) से जूझ रहे थे। यह बीमारी धीरे-धीरे शारीरिक गति और मांसपेशियों को प्रभावित करती है और इसमें कंपकंपी, कठोरता और चलने में कठिनाई जैसी समस्याएँ आती हैं।
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11 फरवरी को यह दिन इसलिए चुना गया क्योंकि यह लेडी ऑफ लूर्डेस का स्मृति दिवस है। लेडी ऑफ लूर्डेस वर्जिन मैरी की एक उपाधि है, जो फ्रांस के लूर्डेस में उनकी स्पष्ट उपस्थिति के कारण दी जाती है।
इस दिन का उद्देश्य सिर्फ बीमारों को आशा देना ही नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल करने वालों का सम्मान करना और समाज में दयालुता और सहानुभूति को बढ़ावा देना भी है।
विश्व बीमार दिवस का क्या है महत्व
विश्व बीमार दिवस का मुख्य उद्देश्य बीमारों और पीड़ितों के लिए सहानुभूति, विश्वास और आशा बढ़ाना है।
ईसाई धर्म और विशेष रूप से पोप जॉन पॉल द्वितीय की शिक्षाओं में पीड़ा का विषय बहुत महत्वपूर्ण है। पोप ने लिखा था कि पीड़ा मनुष्य के अतिक्रमण से संबंधित प्रतीत होती है यह उन बिंदुओं में से एक है जहां मनुष्य स्वयं से परे जाने के लिए बुलाया जाता है।
इस दिन की स्थापना सिर्फ बीमारों को आशा और विश्वास देने के लिए ही नहीं की गई थी, बल्कि समाज के सभी लोगों को दयालु बनने और बीमारों के लिए प्रार्थना करने के लिए प्रेरित करना भी इसका मकसद है।
