Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • बुध, 22 जुलाई 2026
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • ई-पेपर
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

महिलाओं के लिए क्यों है ‘वट सावित्री व्रत’ का इतना महत्त्व, जानिए इसका शुभ मुहूर्त और सही तिथि

  • Written By: नवभारत डेस्क
Updated On: May 25, 2022 | 07:01 AM

File Photo

Follow Us
Follow Us:

सीमा कुमारी

अखंड सौभाग्य का प्रतीक ‘वट सावित्री’ (Vat Savitri Vrat) का पावन व्रत इस साल 30 मई, सोमवार को है। इसी दिन सोमवती अमावस्या भी है। हर साल ‘वट सावित्री व्रत’ (Vat Savitri Vrat) ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है।  

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक,’वट सावित्री’ के व्रत का महत्व ‘करवाचौथ’ जितना ही बताया गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं। पति के सुखमय जीवन और दीर्घायु के लिए वटवृक्ष के नीचे भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करती हैं और वृक्ष के चारों और परिक्रमा करती हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से पति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि के साथ लंबी आयु की प्राप्ति होती है। आइए जानें सावित्री व्रत तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व के बारे में-

सम्बंधित ख़बरें

Chaturmas 2026: कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास? भूलकर भी न करें ये काम, वरना पड़ सकता है भारी

Ekadashi Puja : कब है देवशयनी एकादशी? जानिए श्रीहरि के पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व

Bhadli Navami: भड़ली नवमी 2026 साल का सबसे शुभ दिन क्यों है? बिना मुहूर्त सारे मांगलिक कार्य होंगे सफल

Devshayani Ekadashi: देवशयनी एकादशी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसकी महिमा जानिए

 पूजा-मुहूर्त

 ‘ज्येष्ठ अमावस्या’ तिथि प्रारंभ:

 29 मई, 2022 दोपहर 02 बजकर 54 मिनट से आरंभ

 अमावस्या तिथि का समापन:

30 मई, 2022 को शाम 04 बजकर 59 मिनट पर होगा।  

 पूजा-विधि 

‘वट सावित्री व्रत’ के दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं और वट वृक्ष में जल देती हैं। उसके बाद वट वृक्ष में कलावा बांधकर तीन बार परिक्रमा करती है। इसके बाद सिंदूर और रोली से तिलक लगाकर पेड़ की पूजा करती है। वट वृक्ष के नीचे घी का दीया जलाकर, विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद पति की लंबी उम्र की प्रर्थना की जाती है। वट वृक्ष में देवी देवताओं का वास माना गया है। इसलिए ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री अपने पति सत्यवान को पुन: जीवन देने के लिए यमराज को भी विवश कर दिया था। उनकी पतिव्रता धर्म से प्रभावित होकर यमराज ने उनके पति सत्यवान को प्राणदान दिया था, जिससे वे मृत्यु के बाद फिर से जीवित हो गए थे। पतिव्रता सावित्री की कथा अमर हो गई और तब से हर साल ज्येष्ठ अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाने लगा।  

सुहागन महिलाएं ‘वट सावित्री व्रत’ रखती हैं, ताकि उनके पति की उम्र लंबी हो। उनका वैवाहिक जीवन सुखमय हो, सभी संकट एवं कष्ट दूर हो जाएं। वट वृक्ष की पूजा करने से घर में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है। धन का अभाव दूर होता है।  

Why is vat savitri vrat so important for women know its auspicious time and correct date

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: May 25, 2022 | 07:01 AM

Topics:  

  • Lord Vishnu
  • Vat Savitri Vrat Muhurat
  • Vat Savitri Vrat Pooja Vidhi

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.