आखिर हर पुलिस थानों और जेल में क्यों मनाया जाता है जन्माष्टमी का त्योहार, जानें इसके पीछे की वजह

Shri Krishna Janmashtami: पुलिस थानों और जेल में कृष्‍ण जन्‍मोत्‍सव मनाया जाता है। इसका माहौल सबसे ज्यादा उत्तरप्रदेश की जेलों में दिखता है। कहा जाता है कि, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारावास में हुआ था।
जेलों में मनाया जाता है जन्माष्टमी का त्योहार
जेलों में मनाया जाता है जन्माष्टमी का त्योहार (सौ. सोशल मीडिया)
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Krishna Janmashtami 2025 : देशभर में जन्माष्टमी का त्योहार 16 अगस्त को मनाया जाने वाला है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का खास दिन होता है। जन्माष्टमी को लेकर देश के कई हिस्सों में तैयारियां चल रही है, वहीं पर कहीं-कहीं पर अनूठे ढंग से जन्माष्टमी का आयोजन किया जाता है। आपको शायद जानकारी नहीं हो तो पुलिस थानों और जेल में कृष्‍ण जन्‍मोत्‍सव मनाया जाता है। जन्माष्टमी का माहौल सबसे ज्यादा उत्तरप्रदेश की जेलों में दिखता है।

कहा जाता है कि, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारावास में हुआ था जिसके अनुसार जेलों में जन्माष्टमी मनाने की परंपरा निभाई जाती है। जानिए कारावास में जन्माष्टमी मनाने के पीछे की पौराणिक कथा।

कैसे मनाते हैं जेल में जन्माष्टमी

यहां पर जन्माष्टमी के मौके पर जेल में अलग ही माहौल देखने के लिए मिलता है। पुलिस थानों में मंदिरों की तरह ही रात के समय में पूजा-पाठ नियमों के साथ करने के साथ नंदलाला का जन्मदिवस मनाते है। इस दौरान पुलिस वाले रात भर जागते है और भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते है। सभी पुलिस वाले भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हैं कि उनके साथ इस तरह कभी कोई घटना घटित न हो जाए।इस दिन जेलों में बंद कैदियों के लिए खास उत्‍सव का आयोजन किया जाता है। उत्तरप्रदेश के जेलों और थानों में नए तरीके से जन्माष्टमी का त्योहार मनाते है।

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जानिए जन्माष्टमी की पौराणिक कथा

जन्माष्टमी को लेकर पौराणिक कथा पहले से विद्यमान है। कथा के अनुसार, द्वापर युग में कंस को भविष्‍यवाणी हुई कि तुम्‍हारी मौत का कारण तुम्‍हारी बहन देवकी और वासुदेव का पुत्र होगा। इसके बाद कंस ने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को जेल में डलवा दिया, ऐसे में देवकी और वासुदेव के जिसनी संतानें होती कंस उसे मरवा देता. लेकिन जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो ऐसा चमत्कार हुआ की जेल के सभी ताले टूट गए, दरवाजे अपने आप खुल गए। इतना ही नहीं जितने भी संतरी या सिपाही, द्वारपाल पहरे पर लगे थे सभी गहरी नींद में सो गए.वासुदेव श्रीकृष्‍ण को लेकर वृंदावन आ गए। कहा जाता है कि कंस ने देवकी के सात बालकों को मरवा दिया था. आठवीं बार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।

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