चैत्र अमावस्या 2024 आज (सोशल मीडिया)
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: जैसा कि, आज सोमवार को चैत्र अमावस्या यानि भूतड़ी अमावस्या (Bhutadi Amavasya) का दिन है। जहां पर अमावस्या हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के अगले दिन पड़ती है तो वहीं पर इस दिन पूजा-पाठ, स्नान और दान के पितरों का तर्पण करने का बड़ा ही खासा महत्व माना जाता है। क्या आप जानते है आखिर चैत्र अमावस्या को काली रात क्यों कहा जाता है, नकारात्मक शक्तियों से कैसा है इसका संबंध।
जानिए क्यों नकारात्मक होती है अमावस्या
यहां पर अमावस्या या अमावस की रात काली होती है क्योंकि इस दिन चंद्रमा नजर नहीं आता इसे लेकर ज्योतिष में कहा गया है कि, चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है. ऐसे में जब अमावस की रात चंद्रमा नजर नहीं आता है तो इसके प्रभाव से लोग अति भावुक होते हैं। इस दौरान मानव मन में हलचल बढ़ाने वाला दिन होता है इसमें जो लोगों का कमजोर दिल होता रहै वे नकारात्मक शक्तियों के चपेट में आ जाते है। इस दिन अमावास की रात में नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय हो जाती है और इसी दिन जादू-टोना, तंत्र-मंत्र, साधना-सिद्धि प्राप्त करने जैसे काम किए जाते हैं. इसलिए अमावस्या पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
अमावस में इन बातों का रखें ध्यान
आज अमावस के दौरान कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है जो इस प्रकार है..
1-अमावस और ग्रहण के दौरान भूलकर भी रात में बाहर न निकलें,खासकर सुनसान या शमशान आदि जगहों पर न जाएं।
2-पौराणिक मान्यता के अनुसार अमावस की रात शमशान में तांत्रिक साधना करते हैं और शक्तियों को जागृत करते हैं. इस कारण नकारात्मकता सक्रिय हो जाती है।
3-अमावस्या तिथि पर मांसाहार भोजन, शराब,मसूर की दाल, सरसों का साग, मूली और चना आदि जैसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
4-अमावस्या की रात चंद्रमा का मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए अमावस्या पर अधिक बुरे विचार आते हैं. ऐसे में ईश्वर की पूजा-पाठ करें और मन को शांत रखें।
5- इस दिन शुभ और मांगलिक काम जैसे शादी-विवाह, मुंडन और सगाई आदि भी न करें।
6-मान्यता है कि, इस दिन पितरों का अपमान और जानवरों को परेशान भी नहीं करना चाहिए. इस दिन ऐसा कोई काम नहीं करें, जिससे पितृ दोष लगे।