

नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: अक्सर जब लोग थिएटर में जाते हैं, तो वहां बैठकर स्वादिष्ट पॉपकॉर्न का लुत्फ उठाते हैं। यह न केवल फिल्म देखने वालों के लिए स्वादिष्ट नाश्ता होता है,बल्कि यह सिनेमा के इतिहास और विकास की भी याद दिलाता है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि जब दुनिया में इतना कुछ खाने को है,तो फिल्म देखने के दौरान पॉपकॉर्न ही क्यों खाते हैं। तो आइए जानते हैं पॉपकॉर्न दिवस का इतिहास और महत्व।
दरअसल, हर साल 19 जनवरी को नेशनल पॉपकॉर्न डे मनाया जाता है। यह खास दिन पॉपकॉर्न के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को पहचानने के अलावा लोगों को इसके सभी रूपों का आनंद लेने के लिए बनाया गया था।
पॉपकॉर्न का इतिहास काफी दिलचस्प है। यह प्राचीन काल से 5,000 ईसा पूर्व से शुरू हुआ था और माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति मैक्सिको और पेरू में हुई थी,जहां इसे स्थानीय लोगों द्वारा भोजन के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। पॉपकॉर्न मध्य युग के दौरान यूरोप में भी लोकप्रिय था और फिर इसने दुनिया भर में अपनी एक अलग जगह बना ली। आज पॉपकॉर्न एक लोकप्रिय नाश्ता है जिसका आनंद हर क्षेत्र के लोग लेते हैं। इसके अलावा दोस्तों के साथ मूवी नाइट से लेकर परिवार के साथ गेम नाइट तक पॉपकॉर्न का आनंद कई अलग-अलग तरीकों से लिया जाता है।
पॉपकॉर्न का इस्तेमाल अक्सर उत्साह या वक्त बिताने के रूप में किया जाता है। यह नाश्ता पुरानी यादों से भी जुड़ा हुआ है। वहीं सिनेमा के शुरुआती दिनों से ही पॉपकॉर्न फिल्म देखने के अनुभव का अभिन्न अंग रहा है। पॉपकॉर्न और फिल्में एक सदी से भी ज्यादा समय से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
सिनेमा में पॉपकॉर्न का इतिहास 1800 के दशक के अंत तक जाता है, जब इसे पहली बार फिल्म देखने वालों के लिए नाश्ते के रूप में पेश किया गया था। निकेलोडियन्स में परोसे जाने वाले नाश्ते के रूप में अपनी साधारण शुरुआत से लेकर मल्टीप्लेक्सों में प्रमुख स्थान प्राप्त करने तक पॉपकॉर्न फिल्म देखने के अनुभव का एक प्रतिष्ठित हिस्सा बन गया है।