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श्रीकृष्ण के धाम मथुरा में होती है लट्ठमार होली की धूम, जानिए कैसे शुरु हुई ये होली की परंपरा

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Mar 10, 2024 | 12:39 PM

लट्ठमार होली की खासियत (सोशल मीडिया)

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नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: हर किसी के लिए होली का त्योहार (Holi 2024) रंग-बिरंगे रंगों से सजा होता है इसके लिए तैयार कई दिनों पहले से शुरू कर देते है वहीं पर कई जगहों पर होली का सेलिब्रेशन पहले ही शुरु हो जाता है। होली का शानदार सेलिब्रेशन तो श्रीकृष्ण के धाम मथुरा, बरसाना और वृंदावन में देखने के लिए मिलता है।

यहां कि, सबसे पॉपुलर लट्ठमार होली (Lathmar Holi)के बारे में हर कोई जानता है। यह देश ही नहीं विदेश में इतनी फेमस है कि, विदेशी पर्यटक भी देखने आते है। 

यहां पर होती है लट्ठमार होली 

ब्रज में होली की शुरुआत बंसत पंचमी के दिन से ही हो जाती है जो रंगनाथ मंदिर में रंग-बिरंगे गुलाल और रंग के साथ खेलकर खत्म होती है। यहां पर ब्रज में होली को लेकर खासियत है कि,होलाष्टक से ब्रज के मंदिरों में होली खेलना शुरु हो जाता है। यहां पर होली की शुरुआत में लड्डू मारकर होली खेली जाती है। यहां लट्ठमार होली को लेकर कहा जाता है कि, भगवान श्रीकृष्ण के नंदगांव और राधा रानी के गांव बरसाने में कई सालों से होली खेली जाती है,  जिसमें रंग-गुलाल के साथ फूलों की होली खेली जाती है।

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                                                                         लट्ठमार होली की परंपरा (सोशल मीडिया)

क्या है पौराणिक कथा

लट्ठमार होली को लेकर कई मान्यता भगवान श्रीकृषण और राधारानी से जुड़ी है इसे लेकर अलग ही उत्साह देखने के लिए मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण को होली का त्योहार बहुत प्रिय रहा है। यहां पर होली के दिन भगवान श्री कृष्ण अपने सखाओं के साथ नंदगांव से राधारानी के गांव बरसाना जाते थे. तब श्रीकृष्ण के साथ उनके सखा और राधा रानी अपनी सखियों के साथ होली की खेलती थीं, लेकिन राधा रानी के साथ मिलकर उनकी सखियां श्रीकृष्ण और उनके सखाओं को झाड़ियों से उन्हें मारने लगती थी। इसके बाद से ही इस लट्ठमार होली को खेलने की परंपरा शुरु हुई है। जो आज भी बरसाना और नंदगांव में यह परंपरा निभाई जाती है।

कैसी होती है लट्ठमार होली 

यहां पर लट्ठमार होली की बात की जाए तो, एक दिन बरसाने में और एक दिन नंदगांव में होली खेली जाती हैं, जिसमें बरसाने और नंदगांव के युवक और युवतियां भाग लेती हैं. एक दिन बरसाने में नंदगांव के युवक जाते हैं और बरसाने की हुरियारिन उन पर लट्ठ बरसाती हैं और दूसरे दिन बरसाने के युवक नंदगांव पहुंचकर लट्ठमार होली की परंपरा को निभाते हैं. ब्रज में होली के खेल को राधा-कृष्ण के प्रेम से जोड़कर देखा जाता है, जिसको लेकर लोगों में उत्साह और उमंग देखने को मिलता है। यहां पर टेसू के फूलों की होली खेलने का महत्व होता है। इतना ही नहीं रसिया गायन भी आयोजित किया जाता है।

Tradition of celebrating lathmar holi in mathura

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Published On: Mar 10, 2024 | 12:27 PM

Topics:  

  • Lathmar Holi
  • Lifestyle News

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