सीमा कुमारी
नई दिल्ली: सनातन धर्म के लोगों के लिए ‘वरलक्ष्मी’ (Varalakshmi Vrat) व्रत महत्वपूर्ण होता है। यह व्रत हर वर्ष सावन के अंतिम शुक्रवार को रखा जाता है। इस साल यह व्रत आज यानी 25 अगस्त, शुक्रवार 2023 को है। यह पर्व विशेष कर दक्षिण भारतीय राज्यों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।
वरलक्ष्मी व्रत के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है। यह व्रत सभी के लिए वरदान प्राप्त करने वाला माना गया है। इस व्रत और पूजन से मां लक्ष्मी की कृपा होती है और व्यक्ति को धन-संपत्ति, वैभव, संतान, सुख, सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
‘वरलक्ष्मी’ व्रत के दिन महिलाएं अपने पति, बच्चों और परिवार की मंगल कामना के लिए दिनभर उपवास रहकर मां लक्ष्मी की पूजा आराधना करती हैं। आइए जानें वरलक्ष्मी व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-
पंचांग के अनुसार, वरलक्ष्मी व्रत आज यानी 25 अगस्त 2023, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। इस विशेष दिन पर निश्चित लग्न में पूजा पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। इस दिन सिंह लग्न, वृश्चिक लग्न, कुंभ लग्न और वृषभ लग्न में देवी लक्ष्मी पूजा की जाती है।
सुबह 5:55 से सुबह 7:42 तक
दोपहर 12:17 से दोपहर 2:36 तक
शाम 6:22 से शाम 7:50 तक
रात्रि 10:50 से मध्य रात्रि 12:45 तक
पंचांग के अनुसार, वरलक्ष्मी व्रत के दिन तीन अत्यंत शुभ योग बन रहा है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र बनेगा जो सुबह 9:14 तक रहेगा। साथ ही इस विशेष दिन पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:55 से सुबह 9:14 तक रहेगा और रवि योग सुबह 9:14 से 26 अगस्त सुबह 5:56 तक रहेगा। ज्योतिष-शास्त्र में बताया गया ही कि इन शुभ मुहूर्त में पूजा पाठ करने से साधक को विशेष लाभ मिलता है।
वरलक्ष्मी व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई की जाती है। पूजा स्थल को सजाया जाता है और गंगाजल से सभी जगहों को शुद्ध किया जाता है और व्रत का संकल्प लिया जाता है।
लोग अपने घर के बाहर रंगोली बनाते हैं। साथ ही मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति को नए कपड़े पहनाए जाते हैं और उनका श्रृंगार किया जाता है।
यह पूजा दीपावली की ही तरह की जाती है, इसलिए मां लक्ष्मी की मूर्ति के पास भगवान गणेश की प्रतिमा जरूर रखी जाती है।
इसके बाद कलश और अक्षत से वरलक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
विधि-विधान से पूजा की जाती है। इसके बाद मां को भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, देवी वरलक्ष्मी का व्रत एवं पूजन सच्चे मन और श्रद्धा-भक्ति के साथ पूरे विधि-विधान से करने से साधक को अष्टलक्ष्मी की पूजा के समान फल प्राप्त होता है। यह व्रत बहुत ही चमत्कारी और प्रभावशाली है। इस व्रत को करने से साधक की मनोकामनायें पूर्ण होती हैं। सौभाग्यवती स्त्रियों का सौभाग्य अखण्ड़ होता है।
यदि पति-पत्नी दोनों मिलकर इस व्रत को करते है तो उन्हे अत्यंत शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
संतानहीन को संतान की प्राप्ति होती है। दरिद्रता का नाश होता है। जीवन के समस्त अभाव और कष्टों का नाश होता है।
इस व्रत को करने से आने वाली पीढ़ियों तक का जीवन सुखों से भर जाता है। साधक के यश, बल, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।