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-सीमा कुमारी
सनातन हिंदू धर्म में माघ महीने (Magha Month) का बहुत अधिक महत्व है। मान्यताओं के मुताबिक, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (Magh Month Chaturthi) तिथि के दिन विघ्नहर्ता ‘श्री गणेश जी’ का जन्मदिन मनाया जाता है। साल 2022 में ‘गणेश जयंती’ 4 फरवरी, दिन शुक्रवार को है।
‘सकट चौथ’ का व्रत सभी दुखों और परेशानियों को दूर करने के लिए मनाया जाता है, जबकि ‘गणेश जयंती’ (Ganesh Jayanti 2022) को भगवान गणेश के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। कहा जाता है कि, इस दिन व्रत करने और भगवान गणेश की जन्म कथा को सुनने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानें ‘माघी गणेश जयंती’ का शुभ-मुहूर्त, पूजा-विधि और इसकी महिमा –
पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 04 फरवरी शुक्रवार को सुबह 04:38 बजे से शुरू होकर शनिवार 05 फरवरी को सुबह 03:47 बजे समाप्त होती है। गणेश जयंती के दिन सुबह 11.30 बजे से दोपहर 01.41 बजे तक का समय गणपति बप्पा की पूजा के लिए अच्छा बताया गया है।
इस साल दो शुभ योग यानी ‘रवि योग’ और ‘शिव योग’ में गणेश जयंती मनाई जाएगी। 04 फरवरी को शाम 07:10 बजे तक शिव योग रहेगा। रवि योग सुबह 07:08 बजे शुरू होगा और दोपहर 03.58 बजे समाप्त होगा । इन शुभ योग में ‘गणेश जयंती’ मनाई जाएगी।
पूजा स्थल की सफाई करें। मंदिर या पूजा स्थल को फूलों और रोशनी से सजाएं। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान गणेश की मूर्ति रखें। ‘गणेश जी’ को सिंदूर और दूर्वा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग लगाएं। 5 लड्डू गणेश जी को अर्पित करें बाकी गरीबों या ब्राह्मणों को बांट दें। गणेश जी की कथा, चालीसा और आरती करें। इसके बाद भगवान का आशीर्वाद लें।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री गणेश की रचना माता पार्वती ने उबटन से की थी और उसमें प्राण प्रतिष्ठा की थी। उस समय माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी थी। इस वजह से इस दिन गणेश जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि गणेश जयंती के दिन श्री गणेश की पूरे विधि विधान से आराधना करने से वे प्रसन्न हो जाते हैं। गणेश जयंती माघ मास की ‘विनायक चतुर्थी’ के दिन आती है और इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित है। ‘गणेश जयंती’के दिन चंद्र दर्शन न करें अन्यथा आप पर झूठे आरोप लगने की संभावना बढ़ सकती है।