आज है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी, इस कथा के पाठ से विघ्नहर्ता श्रीगणेश दूर करेंगे सारे कष्ट!
Lord Ganesha Vrat Katha:आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत कथा का पाठ करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और विघ्नहर्ता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान गणेश (सौ.सोशल मीडिया)
Bhalchandra Sankashti Chaturthi Vrat Katha: आज यानी 6 मार्च, शुक्रवार को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक एवं लोक मान्यता के अनुसार, इस दिन गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बेहद जरूरी माना गया है। कहा जाता है कि कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।
इसलिए भक्त पूरे मन से पूजा करने के बाद गणेश जी की कथा का पाठ जरूर करते है। अगर आपने भी भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा है, तो पूजा के बाद आप यहां से व्रत कथा पढ़ सकते है।
ये है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार सभी देवता किसी बड़े संकट में फंस गए। अपनी समस्या का समाधान पाने के लिए वे भगवान देवों के देव महादेव के पास पहुंचे। उस समय भगवान शिव, माता पार्वती और उनके दोनों पुत्र कार्तिकेय और भगवान गणेश साथ बैठे हुए थे। देवताओं ने अपनी परेशानी बताकर उनसे सहायता की प्रार्थना की।
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देवताओं की बात सुनकर भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों से पूछा कि इस समस्या का समाधान कौन करेगा। दोनों ही देवताओं की मदद के लिए तैयार हो गए। तब भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। उन्होंने कहा कि जो पहले पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाकर वापस आएगा, वही देवताओं की सहायता करने जाएगा।
यह सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर तुरंत पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े। दूसरी ओर गणेश जी अपने छोटे से वाहन मूषक को देखकर सोच में पड़ गए कि वे इतनी जल्दी पूरी पृथ्वी की परिक्रमा कैसे कर पाएंगे। कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने एक अलग उपाय निकाला।
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गणेश जी उठे और अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की। इसके बाद वे शांत होकर वहीं बैठ गए और कार्तिकेय के लौटने का इंतजार करने लगे। जब भगवान शिव ने उनसे ऐसा करने का कारण पूछा, तो गणेश जी ने विनम्रता से कहा कि माता-पिता के चरणों में ही पूरा संसार बसता है, इसलिए उनकी परिक्रमा करना ही पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है।
गणेश जी की बुद्धिमानी और भक्ति से भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने गणेश जी को देवताओं की सहायता करने का कार्य सौंप दिया और आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त चतुर्थी के दिन उनकी पूजा करेगा और यह कथा सुनेगा, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।
