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आज है ‘लट्ठमार होली’, बड़ा दिलचस्प है इसका इतिहास और पौराणिक महत्व

  • By navabharat
Updated On: Mar 11, 2022 | 07:00 AM

PIC: Twitter

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-सीमा कुमारी

वैसे तो होली का त्योहार मुख्य रूप से रंगों का त्योहार माना जाता है। इस दिन हिन्दू धर्म के लोग एक जुट होकर खुशियां मनाते हैं और एक दूसरे को प्यार के रंगों में सराबोर करके अपनी खुशी जाहिर करते हैं, लेकिन भारत में एक ऐसी भी जगह है जहां रंगों की होली बाद में खेली जाती है पहले खुशियों के नाम पर महिलाएं पुरुषों पर लाठी बरसाती हैं और इस रस्म का सभी पूरा आनंद उठाते हैं।

इसे ‘लट्ठमार होली’ कहा जाता है। बरसाना की लट्ठमार होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। ये होली राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक मानी जाती है। आइए जानें इस साल लट्ठमार होली कब है, इसका इतिहास और पौराणिक महत्व –

इस साल ‘लट्ठमार होली’ आज यानी 11 मार्च को खेली जाएगी। कहा जाता है कि, द्वापरयुग में श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ लट्ठमार होली खेलने की शुरुआत की थी। तब से आज तक ये परंपरा चली आ रही है।

इतिहास और महत्व

द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने कई लीलाएं की है। बाल्यकाल में राधा और गोपियों के साथ श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि, बाल श्रीकृष्ण जब बरसाना में राधाजी और गोपियों के संग होली खेलते थे, तो उनको तंग भी किया करते थे। राधाजी और गोपियां भगवान श्रीकृष्ण और ग्वालों को डंडा लेकर दौड़ाती थीं। श्रीकृष्ण के प्रेम में सराबोर राधाजी और गोपियां उनका रंग गुलाल और डंडों से स्वागत करती थीं। तब से यह परंपरा चली आ रही है।

लट्ठमार होली के दिन पूरे ब्रज में उत्साह देखने को मिलता है। यहां की होली में नंदगांव के पुरुष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं, क्योंकि कृष्ण नंदगांव के थे और राधा बरसाने की थीं। इस दौरान नंदगांव के लोग कमर पर फेंटा लगाकर बरसाना की महिलाओं के साथ होली खेलने पहुंचते हैं। इस बीच बरसाने की महिलाएं उन पर लाठियां भांजती हैं और पुरुष ढाल का इस्तेमाल कर उनकी लाठियों से बचने का प्रयास करते हैं। इस त्योहार को देखने के लिए लोग दूर से दूर से मथुरा आते हैं।

Today is lathmar holi its history and mythological significance is very interesting

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Published On: Mar 11, 2022 | 07:00 AM

Topics:  

  • Lathmar Holi

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