नागपुर: हमारे देश को त्योहारों का देश कहा जाता है। यहां पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह के त्यौहार मनाया जाते हैं। कुछ त्योहार हमारे धार्मिक मान्यताओं से जुड़े होते हैं तो वहीं कुछ हमारे पशु और प्रकृति के प्रेम का भी प्रतीक होते हैं। एक ऐसा ही एक त्योहार पोला है, जिसे बैल-पोला भी कहा जाता है। यह महाराष्ट्र के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में मनाया जाता है। पोला का त्योहार हम अपने खेतीबाड़ी में सहायक कहे जाने वाले बैलों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए करते हैं।
वैसे कहा जाता है कि पोला महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके का त्योहार है, क्योंकि यहां खेती ही प्रमुख कार्य है और आज भी अधिकांश जगहों पर बैल से खेती होती है और लोग अपनी आजीविका के सहयोगी बैलों को आङार जताने के लिए इसे मनाते हैं।
इस दौरान कुछ खास तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनके बारे में हम आपसे जानकारी साझा करने की कोशिश करेंगे। इस दिन घरों में चार से पांच तरह के खास पकवान बनाए जाते हैं, जिनको लोग घर परिवार के साथ साथ आने वाले मेहमानों के साथ शेयर करते हैं।
पोला के त्योहार के दिन खास तौर पर पूरनपोली बनाई जाती है। पूरन पोली आमतौर पर चने की दाल के मिश्रण को भरकर मसाले बनाई गई पूड़ी होती है। इसको बनाने के लिए चने के दाल को पकाकर पीसा जाता है और फिर उसमें तमाम तरह के मसाले व हल्की सी चीनी का मिश्रण डालकर चने की दाल का मसाला बनाया जाता है। इस मसाले में खास तौर से जायफर, इलायची, केसर इत्यादि डालकर चने के दाल के मसाले की गोली बनायी जाती है। फिर उसे आटे में भरकर रोटी या पूड़ी के शेप में बनाकर फिर उसे तवे पर या गर्म तेल की कड़ाही में तला जाता है। पूरन पोली पोला त्यौहार का प्रमुख व्यंजन है, जो महाराष्ट्र के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में साथ साथ मनाया जाता है।
पोला के उत्सव का विशेष पकवान मीठी खीर भी होता है। यह त्योहार की स्वीट डिश हुआ करती है। पोला के त्योहार के दिन लोग मीठी खीर बनाने के लिए ढेर सारा दूध को काफी देर तक उबालते हैं। पिल दूध में मावा (खोवा), चावल और मेवे की कतरन डालकर लोग इसे गाढ़ा होने तक पकाते हैं, ताकि खूब गाड़ी खीर बन सके। उसके बाद इसे केसर से सजाकर शाही अंदाज में खीर को परोसा जाता है।
पोला के मौके पर गुजिया भी बनाने का प्रचलन है। गुजिया को मैदा और आटे के द्वारा खोवा, चीनी और मेवे के साथ काजू-किशमिश और तमाम चीजों का मिश्रण तैयार करने के बाद भरके बनाया जाता है। आमतौर पर यह होली के मौके पर उत्तर भारत में बनने वासी गुजिया की तरह होती है। ऐसी गुजिया पोला पर्व पर मध्य भारत के लोग बनाते हैं।
इसके अलावा कुछ इलाकों में अरबी के पत्ते की बड़ी बनाई जाती है। अरबी के पत्ते को साफ करके इसको बेसन से लपेटकर एक रोल का रूप दिया जाता है और बाद में उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर तेल में तला जाता है और इससे एक अच्छी व स्वादिष्ट नमकीन डिश के तौर पर आने वाले मेहमानों और घर परिवार के सदस्यों के सामने पेश किया जाता है।
पोला के दिन कई घरों में मिश्रभाजी भी बनती है। तमाम तरह की सब्जियों को एक साथ मिक्स करके पकाया जाता है, ताकि तरह-तरह के स्वाद और पोषण तत्व वाली सब्जियां एक साथ लोगों को खाने को मिल सके। इसका एक खास महत्व व उपयोगिता भी है।