Pregnancy Stretch Marks: गर्भावस्था में स्ट्रेच मार्क्स से हैं परेशान? तुरंंत शुरू कर दें ये खास देखभाल

Pregnancy Tips: गर्भावस्था के दौरान स्ट्रेच मार्क्स एक आम समस्या है। जानें कैसे प्रभावी आयुर्वेदिक उपायों की मदद से आप अपनी त्वचा की स्ट्रेस मार्क्स और प्राकृतिक चमक बरकरार को रख सकती हैं।
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गर्भवती महिला पेट पर स्ट्रेच मार्क्स (सौ. एआई)
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Maternity Care: गर्भावस्था का सफर एक महिला के जीवन का सबसे सुखद और महत्वपूर्ण अनुभव होता है। हालांकि इस नौ महीने की यात्रा के दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आते हैं। इन्हीं बदलावों में से एक है स्ट्रेच मार्क्स जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में स्ट्राई ग्रेविडेरम कहा जाता है। ये निशान मुख्य रूप से पेट, जांघों, कूल्हों और कभी-कभी स्तनों के आसपास दिखाई देने वाली हल्की या गहरी लकीरों के रूप में उभरते हैं। हालांकि ये पूरी तरह से हानिकारक नहीं होते लेकिन अपनी त्वचा की बनावट को लेकर कई महिलाओं के मन में यह चिंता और असहजता का कारण बन जाते हैं।

कैसे और क्यों बनते हैं ये निशान

गर्भावस्था के दौरान जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है त्वचा में तेजी से खिंचाव पैदा होता है। जब त्वचा की अंदरूनी परतें इस तीव्र खिंचाव को पूरी तरह सहन नहीं कर पाती तो वहां सूक्ष्म निशान बन जाते हैं। शुरुआत में ये निशान गुलाबी या लाल रंग के दिखाई देते हैं लेकिन समय बीतने के साथ इनका रंग हल्का सफेद या चांदी जैसा हो जाता है। भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का मानना है कि यदि त्वचा को भीतर से उचित पोषण और बाहर से सही सुरक्षा मिले तो इन निशानों की तीव्रता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आयुर्वेदिक उपचारों में प्राकृतिक तेलों और जड़ी-बूटियों के उपयोग को त्वचा की सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी बताया गया है।

घरेलू उपाय

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार चंदन, वेटिवर और तुलसी जैसी औषधियां त्वचा की लोच बनाए रखने में रामबाण सिद्ध होती हैं। इनका लेप बनाकर और उसे किसी सौम्य तेल के साथ मिलाकर पेट पर नियमित रूप से लगाने की सलाह दी जाती है। यह न केवल त्वचा को मुलायम बनाता है बल्कि खिंचाव के कारण होने वाली खुजली और जलन से भी राहत दिलाता है। बेहतर परिणामों के लिए इस देखभाल को गर्भावस्था के चौथे महीने से ही शुरू कर देना चाहिए।

इसके अतिरिक्त करंज के पत्तों से तैयार तेल या लेप भी त्वचा की नमी और लचीलापन बरकरार रखने में सहायक माना जाता है। यह त्वचा के सूखेपन को कम करता है जिससे स्ट्रेच मार्क्स बनने की संभावना काफी हद तक घट जाती है।

आहार का महत्व

अक्सर देखा जाता है कि खुजली होने पर महिलाएं त्वचा को रगड़ या खुरच देती हैं लेकिन आयुर्वेद में इसे वर्जित माना गया है। त्वचा को खुजलाने से ये निशान और भी गहरे और स्थाई हो सकते हैं। खुजली होने पर हमेशा प्राकृतिक तेल का ही उपयोग करना चाहिए।

त्वचा की मजबूती के लिए केवल बाहरी लेप ही पर्याप्त नहीं है बल्कि संतुलित आहार भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन, ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन त्वचा को अंदरूनी रूप से मजबूत बनाता है।

स्ट्रेच मार्क्स को पूरी तरह से रोकना हमेशा संभव नहीं होता क्योंकि यह शरीर के प्राकृतिक विकास का हिस्सा हैं लेकिन सही आयुर्वेदिक देखभाल, नियमित मालिश और स्वस्थ जीवनशैली से इन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। धैर्य और निरंतरता के साथ किए गए ये उपाय आपकी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करेंगे।

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